CHAPTER-1
(मात्रक)
(UNITS)
1.मापन की आवष्यकता(UNITS AND MEASUREMENT)=वे सभी राषियॉं, जिनके पदों में भौतिकी के नियामो को व्यक्त किया जा सकता है तथा जिनका मापन किया जा सकता है, भौतिक राषियॉं कहलाती है।
2.मापन के मात्रक(RNITS OF MEASUREMENT)=किसी भौतिक राषि के मापन के लिए निर्देष मानक को उस भौतिक राषि का मात्रक कहते हैं।
3.मात्रकों के गुण(PROPERTIES OF UNITS)=
1.मात्रक का परिणाम ऐसा होना चाहिए कि राषि का संख्यांक सामान्यतः न बहुत बउा हो और न ही बहुत छोटा।
2.वह पूर्णतः निष्चित और स्पष्ट रूप से परिभाषित हो
3.समय के साथ उसमें परिवर्तन न हो।
4.उसमें स्थायित्व का गुण हो।
5.वह सर्वमान्य हो।
6.भौतिक अवस्था के बदल जाने पर भी उसमें कोई परिवर्तन न हो।
4.मूल राषियॉं और व्युत्पन्न राषियॉं(FUNDAMENTAL QUANTITIES AND DERIVED QUANTITIES)=
1.जो राषियॉं एक-दूसरे से पूर्णतः स्वतन्त्र रहती है, उन्हें मूल राषियॉं कहते है।
2.जो राषियॉं मूल राषियों से व्युत्पन्न की जा सकती है, उन्हें व्युत्पन्न राषियॉें कहते है।
राषि
|
मात्रक के मान
|
संकेत
|
लम्बाई
|
मीटर
|
m
|
द्रव्यमान
|
किलोग्राम
|
kg
|
समय
|
सेकेण्ड
|
s
|
ताप
|
केल्विन
|
k
|
विद्युतधारा
|
एम्पियर
|
a
|
ज्योति-तीव्रता
|
कैण्डेला
|
cd
|
पदार्थ की मात्रा
|
मोल
|
mol
|
पूरक मूल मात्रक
| ||
समतल कोण
|
रेडियन
|
rad
|
घन कोण
|
स्टेरेडियन
|
sr
|
मूल मात्रक की तीन पद्धतियां होती है-
1-(F.P.S.)फुट, पौण्ड, सेकेण्ड पद्धति इस प्रणाली को ब्रिटिष प्रणाली भी कहते है।
2-(C.G.S.)सेन्टीमीटर, ग्राम, सैकण्ड पद्धति यह M.K.S प्रणाली का छोट रूप है
3-(M.K.S.)मीटर, किलोग्राम, सैकण्ड पद्धति इस प्रणाली को मिट्रिक प्रणाली पद्धति भी कहते है।
Comments
Post a Comment