CHAPTER-4
तुल्यकालिक मोटर(SYNCHRONUS MOTOR)
1.जो मोटर ए.सी. इनपुट की आवृति द्वारा निर्धारित गति पर घूर्णन करती है, वह तुल्यकालिक मोटर कहलाती है।
2.तुल्कालिक मोटर की गति स्थिर होती है।
3.बलाघूर्ण का वह अधिकतम मान जिसे मोटर तुल्यकाल खोए बिना प्रदान करे, पुल आउट बलाघुर्ण कहलाता है।
4.तुल्यकालिक मोटर अग्रगामी, पश्चगामी और इकाई शक्ति गुणक पर चलाया जा सकता है।
5.जब उत्तेजन कमजोर होता है तब विराधी विद्युत वाहक बल का मान, विभव से कम होता तो मोटर पश्चगामी शक्ति गुण पर चलती है।
6.जब उत्तेजन को बढाकर विरोधी विद्युत वाहक बल का मान, विभव के मान बराबर हो जाता है तो
मोटर इकाई शक्ति गुणक पर चलती है।
मोटर इकाई शक्ति गुणक पर चलती है।
7.जब उत्तेजन को सामान्य से अधिक होता है, तो विरोधी विद्युत वाहक बल का मान, विभव के मान से अधिक हो जाता है तो मोटर अग्रगामी शक्ति गुणक पर चलती है।
8.आर्मेचर धारा व क्षेत्र धारा के बीच खीचा गया ग्राफ सीधा वक्र बनता है।
9.शक्ति गुणक और क्षेत्र धारा के मध्य खीचा गया ग्राफ उल्टा वक्र होता है।
10.तुल्यकालिक मोटर का प्रारम्भ करने की विधि-
1.कम्पाउण्ड मोटर या शंट मोटर
2.पोनी मोटर
3.अवमन्दक वाइन्डिग
4.स्लिपरिंग
11.तुल्कालिक मोटर का प्रयोग शक्ति गुणक सुधारने मे किया जाता है।
12.तुल्यकालिक मोटर का प्रारम्भिक बलाघूर्ण शून्य होता है।
13.तुल्यकालिक मोटर तुल्यकालिक गति पर चलती है।
14.तुल्यकालिक मोटर की गति प्रत्येक लोड पर एक समान होती है।
15.तुल्यकालिक मोटर जब बिना लोड के अग्रगामी शक्ति गुणक पर रिएक्टिव शक्ति सप्लाई करती है
तो मोटर तुल्यकालिक संघनित्र की तरह कार्य करती है।
तो मोटर तुल्यकालिक संघनित्र की तरह कार्य करती है।
16.तुल्कालिक मोटर मे लोड परिवर्तन के कारण मोटर की गति कुछ घट जाती है इस दोष को हन्टिग दोष या फेज स्विगिग कहते है।
17.हन्टिग दोष को दूर करने के मोटर मे रोटर के पोलो के सिरो पर अवमन्दक वाइन्डिग स्थापित की जाती है।
18.तुल्यकालिक मोटर इकाई शक्ति गुणक पर आर्मेचर धारा निम्न लेती है।
19.तुल्यकालिक मोटर की गति सप्लाई आवृति व स्टेटर मे ध्रुवों की संख्या पर निर्भर करती है।
20.तुल्यकालिक मोटर मे उत्तेजन बढाने पर शक्ति गुणक सुधर जाता है।
21.तुल्यकालिक मोटर मे आर्मेचर धारा निम्न व उच्च उत्तेजन पर अधिक होती है।
22.तुल्यकालिक मोटर मे वोल्टेज घटने बढने से घूर्णन गति मे कम परिवर्तन होता है पर 5-10 से अधिक वोल्टेज परिवर्तन पर मोटर रूक जाती है।
23.तुल्यकालिक मोटर की ध्रुवता परिवर्तित होने का समय बहुत कम 1/50 सेकेण्ड होता है।
24.तुल्यकालिक गति पर क्रॉस फल्क्स का मान अधिकतम होता है।
25.सैलिएण्ट पोल टाइप ऑटो तुल्यकालिक मोटर हल्क लोड पर स्टार्ट हो जाती है।
26.पोनी मोटर के स्टेटर पोल्स की संख्या तुल्यकालिक मोटर के स्टेटर पोल्स की संख्या से अपेक्षाकृत एक जोडा कम रखा जाता है।
27.तुल्यकालिक मोटर मे पोल्स की संख्या कम करके मोटर की गति बढायी जा सकती है।
28.तुल्यकालिक मोटर मे गति नियंत्रण की कोई व्यवस्था नही होती है।
29.तुल्यकालिक गति व रोटर गति का अन्तर एब्सोल्यूट स्लिप कहलाती है।
30.तुल्यकालिक मोटर की गति टैको मीटर द्वारा ज्ञात की जाती है।
31.पोनी मोटर एक प्रेरण प्रकार मोटर है।
32.डैम्पर वाइडिंग कापॅर की मोटी पत्तियो द्वारा स्थापित की जाती है।
33.तुल्यकालिक मोटर की दक्षता अधिक होती है।
34.सैलिएण्ट पोल टाइप तुल्यकालिक मोटर मे सैलिएण्ट पोल रोटर पर बने होते है।
35.तुल्यकालिक मोटर का प्रचालन जब रोटर के स्थिर पोल व स्टेटर के घूमते पोल के साथ इन्टलॉक हो जाते है
36.तुल्यकालिक मोटर को सप्लाई लाइन के समानान्तर मे जोडा जाता है। पावर फैक्टर सुधारने के
लिए।
लिए।
37.सैलिएण्ट टाइप तुल्यकालिक मोटर 1500 R.P.M. से कम गति पर प्रचालित होती है।
38.तुल्यकालिक चाल NS=120f/P
बैक EMF की जानकारी।
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