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D.C. MACHINES AND MOTOR

                                                          CHAPTER-6
                                         (D.C. MACHINES AND MOTOR)
1.डी.सी. मषीन जो विद्युत ऊर्जा को यांन्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करती है।
2.वे मषीन जिनके प्रचालन के लिए दिष्ट धारा का प्रयोग किया जाता हैदिष्ट धारा मषीन कहलाती है।
3.दिष्ट धारा मषीन को मुख्यतः मोटर एवं जनरेटर के रूप में प्रयोग किया जाता है।
4.डी.सी. मोटर एवं डी.सी. जनरेटर दोनों ही डी.सी. मषीन के भाग है।
5.फील्ड वाइन्डिंग को उत्तेजन वाइन्डिग कहतें है।
6. डी.सी. मषीन का गतिषील भाग आर्मेचर कहलाता है।
7.स्टेटर में चार मैग्नेटिक पोल लगे होते है।
8.स्टेटर में दो सिरा प्लेटे लगी होती है।
9.पोल कोर का उपयोग फील्ड वाइन्डिग को रोके रखने के लिए किया जाता है।
10.शन्ट वाइन्डिग पतले तार एवं अधिक टर्न्स की बनी होती है।
11.सीरिज वाइन्डिग मोटे तार एवं कम टर्न्स की बनी होती है।
12.स्टेटर की संरचना वलयाकार होती है।
13.स्टेटर का बाहरी आवरण योक है।
14.आर्मेचर में वाइन्डिंग का संयोजन श्रेणी अथवा समानान्तर क्रम होता है।
15. डी.सी. आर्मेचर में लैप वाइन्डिग व वेव वाइन्डिग प्रयुक्त की जाती है।
16.डी.सी. सीरिज मोटरक्रेनों में प्रयोग कि जाती है।
17. डी.सी. मोटर और जनरेटर के बीच कोई अन्तर नहीं होता है।
18. डी.सी. शंट मोटर की गतिफील्ड वाइन्डिग में श्रेणी क्रम में एक प्रतिरोधक को जोडकर गति परिवर्तित की जा सकती है।
19.स्थिर गति कार्य हेतु डी.सी. शंट मोटर प्रयुक्त होती है।
20. डी.सी. कम्युलेटिव कम्पाउण्ड मोटर में सिरीज फील्ड का फलक्सशन्ट फील्ड फलक्स का सहयोग करता है।
21. डी.सी. थ्री प्वाइन्ट स्टार्टर में आर्मेचर के श्रेणी क्रम में लगने वाला प्रतिरोध यूरेका धातु का बना होता है।
22. डी.सी. सीरिज मोटर की गति लोड बढने के साथ घटती है।
23. डी.सी. थ्री प्वाइन्ट स्टार्टर में मोटर को ओवर लोड के नुकसान से बचाने के लिए ओवर लोड क्वाइल का प्रयोग किया जाता है।
24. डी.सी. सीरिज मोटर का स्टार्टिगं टार्क बहुत उच्च होता है। जिसे बिना लोड के नहीं चलाया जाता है।
25.यदि किसी डी.सी. मोटर के सप्लाई टर्मिनल को परस्पर में बदल दिया जाए तों मोटर के घूमने की दिषा वहीं रहेगी।
26. डी.सी. मोटर में स्टार्टर का मुख्य कार्य स्टार्टिंग धारा को सीमित करने के लिए किया जाता है।
27. डी.सी. शंट मोटर लोड रहित अवस्था में कार्यरत है। और उसकी फील्ड वाइन्डिग ओपन-सर्किट हो जाए तो मोटर की घूर्णन गति उच्च हो जाएगी।
28.हिस्टेªसिस क्षति का मान कम रहे इसलिए आर्मेचर ड्रम को लेमिनेटेड बनाया जाता है।
29.किसी डी.सी. मोटर में प्रारम्भ में विरोधी वि.वा. बल बराबर शून्य के बराबर होता है।
30. डी.सी. मोटर उच्चटार्कशक्तिभार अभिलक्षण आदि विषेषताओं के कारण महत्वपूर्ण है।
31.शाफ्ट टॉर्क की इकाई ब्रेक हॉर्स पावर (B.H.P.) है।
32. डी.सी. सिरीज मोटर की स्टार्टिंग धारा पूर्ण भार धारा का 1.5 गुना होता है।
33. डी.सी. शंट मोटर का स्टार्टिंग टार्क पूर्ण भार टॉर्क का 1-5 गुना होता है। व इसकी गति स्थिर रहती है।
34.डिफरेन्षियल काम्पाउण्ड मोटर में शन्ट फील्ड फलक्ससिरीज फील्ड फल्कस का विरोधी होता है।
35.विद्युत दक्षता यह यांत्रिक शक्ति आउटपुट व विद्युत दक्षता इनपुट का अनुपात होता है।
36.व्यावसायिक दक्षता यह आउटपुट शक्ति व इनपुट शक्त् िके अनुपात होता है। इसे ओवरऑल दक्षता भी कहतें है।
37.यांत्रिक दक्षता यह व्यावसायिक दक्षता व विद्युत दक्षता का अनुपात होता है।
38. डी.सी. मोटर के प्रेरित होने वाले वि.वा. बल आरोपित वि.वा. बल का विरोध करता है।
39. डी.सी. मोटर का स्टार्टिंग प्रतिरोध 1 से 10 ओम्ह होता है।
40.एक कम्पाउण्ड मोटर में दो फील्ड वाइन्डिग होती है।
41.यदि डी.सी. मोटर में विरोधी वि.वा. बल अनुपस्थित हो तो मोटर तुरन्त जल जायगी।
42.छोटी मोटर की गति को घटाने के लिए सप्लाई वोल्टेज नियन्त्रक विधि का उपयोग करतें है।
43.बिन्दु वाले स्टार्टर का प्रयोग मुख्यतः सामान्य से अधिक घूर्णन गति नियन्त्रण युक्त कम्पाउण्ड मोटर के साथ किया जाता है।
44.वार्ड-लियोनार्ड विधि से मोटर की घूर्णन गति का नियंत्रण दोनों दिषाओं में सामान्य से कम अथवा अधिक गति के लिए किया जाता है।
45. डी.सी. मोटर या जनरेटर में आर्मेचर में यांित्रक सन्तुलन स्थापित करने के लिए डमी क्वाइल स्थापित की जाती है।
46. डी.सी. सिरीज मोटर में घूर्णन गति नियंत्रण  के लिए टैप्ड फील्ड नियंत्रण विधि का प्रयोग किया जाता है।
47.दिष्ट धारा मोटर की चाल शून्य भार पर अनन्त होती है।
48. डी.सी. शंट तथा कम्पाउण्ड मोटर के लिए लौह क्षति नियत होती है।
49.गति नियंत्रण में सिरीज पैरेलल विधि का प्रयोग सिरीज मोटर में किया जाता है।
50.शंट व कम्पाउण्ड डी.सी. मोटस के लिए चार बिन्दु स्टाटेर प्रयोग किया जाता है।
51.सिरीज मोटर में चुम्बकीय फील्ड फ्लक्स नियत होती है।
52. डी.सी. मोटर में विरोधी वाहक बल का मान नो लोड पर अधिकतम होता है।
53.फ्लैमिंग के दाएं हाथ का नियम उत्पन्न विद्युत वाहक बल की दिषा ज्ञात करने में करते है।
54. डी.सी. मोटर कार्यरत है। यदि फील्ड वाइन्डिग अचानक ओपन सर्किट हो जाए तों मोटर रूक जाएगी।
55. डी.सी.3-बिन्दु स्टार्टर मे NVC का सम्बन्ध श्रेणी में शंट क्षेत्र की आपूर्ति से है।
56.प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र प्राप्त करने के लिएविद्युत मोटर के आर्मेचर तथा धु्रव फलक के बीच वायु अन्तर को कम से कम रखा जाता है।
57. डी.सी. मोटर का आर्मेचर में एडी-करंट क्षति कम करने के लिए पटलित होता है।
58. डी.सी. मोटर की बियरिंग्स धोने के लिए पेट्रोल का प्रयोग किया जाता है।
59.डी.सी. मोटर की बॉडी ढलवा लोहा या इस्पात की बनी होती हैं। इस्पात का प्रयोेग उच्च क्षमता वाली मषीनों में किया जाता है।
60.आर्मेचर ताम्र हानि-Ia2Ra
61.फील्ड वाइन्डिग ताम्र हानि-Ish2×Rs
62.सिरीज वाइन्डिग ताम्र हानि- Ise2×Rse
63.इन्टरपोल वाइन्डिग हानि-IC2×इन्टरपोल प्रतिरोध
64.हिस्ट्रेसिस हानि- Wh= ηBfmax1.6अर्ग प्रति सैकण्ड
65.भंवर हानि-w=13.6×10-2×Bmax2 f2t2वाट






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