Skip to main content

VELOCITY AND SPEED

                        CHAPTER-2
                                    वेग और चाल(VELOCITY AND SPEED)
1.निश्‍चित दिशा तक वस्‍तु द्वारा एकांक समय मे चली गई दूरी को उसका वेग कहते है।
2.वेग एक सदिश राशि है।
3.वेग धनात्‍मक व ऋणात्‍मक दोने हो सकात है।
4.वेग=विस्‍थापन/समय
5.वेग का मात्रक M.K.S. प्रणाली मे मीटर/सेकेण्‍ड
6.किसी वस्‍तु का वेग यह बताता है कि वस्‍तु कितनी तेज चल रही है और किस दिशा मे चल रही है।
7.किसी वस्‍तु द्वारा एकांक समय मे चली गई दूरी को उसकी चाल कहते है।
8.चाल एक अदिश राशि है।
9.इकाई समय मे वस्‍तु द्वारा तय की गई दूरी की ही माप की जाती है। चाल सदैव धनात्‍मक होती है।
10.चाल=तय की गई दूरी/समय
11.चाल का मात्रक M.K.S. प्रणाली मे मीटर/सेकेण्‍ड
12.वह राशियां जिनमे केवल परिमाण और दिशा दोनो की आवश्‍यकता होती है, सदिशा राशियां कहलाती है।
13.सदिश राशियां-विस्‍थापन, वेग, त्‍वरण, बल, आवेग, संवेग आदि।
14.वह राशिया जिनमे केवल परिमाण की आवश्‍यकता होती है दिशा की नही अदिश राशियां कहलाती है।
15.अदिश राशियां-द्रव्‍यमान, दूरी, समय, चाल, आयतन, कार्य, शक्ति आदि।
16.समय के साथ वेग मे परिवर्तन की दर को त्‍वरण कहते है।
17.त्‍वरण=वेग मे परिवर्तन/समय अंतराल
18.त्‍वरण का मात्रक M.K.S. प्रणाली मे मीटर/सेकेण्‍ड2 तथा C.G.S. प्रणाली मे सेमी./सेकेण्‍ड2 होता है।
19.जब समय के साथ वेग घटता है तो उसमे उत्‍पन्‍न त्‍वरण को मंदन या ऋणात्‍मक त्‍वरण कहते है।
20.पृथ्‍वी की ओर स्‍वतन्‍त्रतापूर्वक गिरती हुई वस्‍तु मे उत्‍पन्‍न त्‍वरण गुरूत्‍वीय त्‍वरण कहते है।
21.गुरूत्‍वीय त्‍वरण को से प्रदर्शित करते है। इसका मात्रक प्रणाली मे 9.81 मी./सेकेण्ड2 होता है।
22.न्‍यूटन गति का प्रथम नियम=जो वस्‍तु स्थिर है वह स्थ्रि ही रहेगी और जो वस्‍तु गतिमान है वह उसी वेग से उसी दिशा मे तब तक गतिमान रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाये।
23.न्‍यूटन गति का प्रथम नियम जडत्‍व का नियम भी कहते है।
24.न्‍यूटन गति का द्वितीय नियम=किसी वस्‍तु के संवेग मे  परिवर्तन की दर उस पर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है और यह परिवर्तन बल की दिशा मे ही होता है।
25.न्‍यूटन गति का तूतीय नियम=प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
26.गति के समीकरण
1.V=U+AT
2.S=UT+AT2/2
3.V2=U2+2AS
27.किसी वस्‍तु के द्रव्‍यमान और वेग के गुणनफल को उस वस्‍तु का संवेग कहते है।
28.संवेग एक सदिश राशि है।
29.संवेग=द्रव्‍यमान*वेग
30.संवेग का मात्रक M.K.S. प्रणाली मे किग्रा.मीटर/सेकेण्‍ड
31.जब कोई बल किसी वस्‍तु पर अल्‍प समय के लिए लगाया जाता है तो बल और समय के गुणनफल को बल का आवेग कहते है।
32.आवेग बल के कुल प्रभाव की माप है।
33.संवेग मे परिवर्तन को भी आवेग कहते है।
34.द्रव्‍यमान एक अदिश राशि है।                                             
35.एक वस्‍तु का पूर्ण भार जिस बिन्‍दु पर समकेन्द्रित माना जाता है। उसे गुरूत्‍व केन्‍द्र कहते है।

Comments

Popular posts from this blog

METALS

                                                                  CHAPTER-3                                                                 धातुएं (METALS) 1.(INTRODUCTION)=   धातुएं धातु खनिज पदार्थ होते है। जो प्रकृति से अयस्कों के रूप में प्राप्त होते है। असस्कों से धातुओं से प्राप्त करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रक्रमों से गुजरना पडता है जिससे अयस्क में से धात्विक तथा अधात्विक पदाथ्र पृथक् हो जाते है। 2. धातुओ के गुण (PROPERTIES OF METALS)= 1. भौतिक गुण (PHYSICAL PROPERTIES)= 1. रंग (COLOUR)= प्रत्येक ध...

MACHINE CONTROL PANEL

CHAPTER-1 (MACHINE CONTROL PANEL) 1. वह युक्ति जिसके माध्‍यम से विभिन्‍न मशीनो या युक्तियो मे विद्युत प्रवाह को नियंत्रित किया जाता है कंट्रोल पैनल कहलाता हैं। 2. कंट्रोल पैनल मे प्रयोग कियो जाने वाले स्विचों की परास, नियंत्रित की जाने वाली मोटर क्षमता पर निर्भर करती है। 3. कंट्रोल पैनल का आकार नियंत्रित की जाने वाली मशीनों की संख्‍याय पर निर्भर करता है। 4. कंट्रोल पैनल के भाग-1.वॉल माउन्टिड                    2.फ्री स्‍टेन्डिंग, सिंगल फ्रन्‍ट, विथ फ्रन्‍ट एक्‍सेस ओनली                    3.फ्री स्‍टेन्डिंग, सिंगल फ्रन्‍ट, विथ एक्‍सेस फ्रोम द फ्रन्‍ट एन्‍ड रिअर                    4.फ्री स्‍टेन्डिंग डबल फ्रन्‍ट                ...

COMMON HAND TOOLS

CHAPTER-2   COMMON HAND TOOLS 1. पेंचकस   का साईज का निर्धारण इनके ब्लेड के आधार पर किया जाता है। 2. पेचकस का वह भाग जो हार्ड व टैम्पर किया हुआ भाग बिट कहलाता है। 3. इलैक्ट्रिषियन के कार्य में उपयोग होने वाले पेचकस का हैण्डिल सेल्यूलोज से बना होता है। 4. किसी कार्य विषेष के लिए पेचकस का चयन पेच का साइज के अनुसार किया जाता है। 5. एक इलैक्ट्रिषियन के कार्य में सबसें अधिक उपयोग इन्सुलेटिड कम्बीनेषन प्लायर होता है। 5. काम्बीनेषन प्लायर के साईज का जबडे के सिरे से हैण्डिल के अन्त सिरे तक निर्धारण किया जाता हैं। 6. प्लायर के दोनों जबडे रिवेट से जुड रहते है। 7. प्लायर को जाच हाने पर इसे खोलने के लिए मोबाइल आयल डालना चाहिये। 8. सामान्य साईड कटिंग प्लायर का साइज   15cm  होता है। 9. लकडी के बोर्ड में पेच कसने से पूर्व ब्राडल का उपयोग करना चाहिये । 10. फेज टेस्टर का उपयोग फेज चेक करने के लिए किया जाता है। 11. फेज टेस्टर में लगा लैम्प नियोन लैम्प होता हैं। 12. फेज टेस्टर का उपयोग   500watt  से अधिक प्रदाय पर नहीं करना चाहिय। 13. एक बा...