CHAPTER-1
थ्री फेज मोटर(THREE PHASE INDUCTION MOTOR)
1.त्रिकलीय प्रेरण मोटर अच्छा गति रेगुलेशन तथा उच्च प्रारम्भिक बलाघूर्ण रखती है।
2.रोटर परिपथ मे प्रेरण द्वारा आवश्यक वोल्टेज तथा धारा, स्टेटर वाइन्डिग द्वारा उतपन्न की जाती है।
3.त्रिकलीय प्रेरण मोटर को उद्योगों का वर्कहॉर्स भी कहते है।
4.एकलीय प्रेरण मोटर को फ्रैक्शनल हॉर्स पावर भी कहते है।
5.थ्री फेज मोटर, पिंजरा प्ररूपी प्रकार व स्लिपरिंग प्रकार मोटर होती है। यह विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करती है।
6.थ्री फेज मोटर का स्टेटर उच्च ग्रेड मिश्रित स्टील परत का बना होता है, जिससे भवर हानि कम
होती है।
होती है।
7.थ्री फेज मोटर की वाइन्डिग को 1200 विद्युत डिग्री के अन्तर पर रखा जाता है।
8.पिजंरा प्रारूपी रोटर की छडें एल्युमिनियम या कॉपर की बनी होती है।
9.पिंजरा प्रारूपी रोटर के खाचें शाफ्ट के समानान्तर नहीं बनाए जाते है,बल्कि विषमित बनाए जाते है। (इसका कारण-
1.ये चुम्ब्कीय भनभनाहट को कम करता है।
2.ये रोटर बंधित प्रवृत्ति को कम करता है।)
10.स्लिपरिंग मोटर का कुण्डलित रोटर की क्रोड भी पटलित रखी जाती है।
11.स्लिपरिंग मोटर औद्योगिक क्षेत्र मे 5% ही काम मे ली जाती है।
12.स्लिपरिंग मोटर उच्च शुरूआती बलाघूर्ण रखती है।
13. स्लिपरिंग प्रेरण मोटर मे स्टेटर पोल के बराबर संख्या मे रोटर पोल कुण्डलित होने चाहिए।
14.स्लिपरिंग मोटर की गति रोटर प्रतिरोध के द्वारा नियंत्रण संभव है।
15.स्लिपरिंग मोटर कापॅर हानि ज्यादा होने के कारण इसकी दक्षता कम होती है।
16.पिंजरा मोटर मे रोटर छडें एण्ड रिंग की सहायता से अंत मे शॉर्ट होती है।
17.पिंजरा मोटर की रख-रखाव की आवश्यकता कम होती है।
18.पिंजरा मोटर का उपयोग लगभग 95% होता है।
19.पिंजरा मोटर मध्य श्रेणी का शुरूआती बलाघूर्ण रखती है। जिसको नियंत्रित नही किया जा सकता है।
20.पिंजरा मोटर मे स्वाचालित रूप पोल स्टेटर के पालो की संख्या के समान रोटर मे समन्वित हो जाते है।
21.पिंजरा मोटर मे कापॅर हानि कम होने के कारण इसकी दक्षता ज्यादा होती है।
22.प्रेरण मोटर को अतुल्यकालिक मोटर भी कहते है, क्योकि रोटर घूर्णित चुम्बकीय क्षेत्र की गति के समान नहीं घूमता है।
23.पिंजरा मोटर की गति शून्य लोड तथा फुल लोड पर एक समान रहती है, पर फुल लोड से ज्यादा लोड पर गति घट जाती है।
24. पिंजरा मोटर प्रारम्भ करते समय मोटर का शक्ति गुणक कम होने के कारण प्रारम्भिक बलाघूर्ण कम हो जाता है।
25.स्लिपरिंग प्रेरण मोटर मे रोटर वाइन्डिग तथा स्टेटर वाइन्डिग में पोलो तथा फेजों की संख्या समान होती है।
26.स्लिपरिंग मोटर का उपयोग जहॉं प्रारम्भ मे प्रारम्भिक बलाघूर्ण की आवश्यकता होती है।
27.पिंजरा मोटर प्रारम्भिक धारा पूर्ण भार धारा का लगभग 5 से 6 गुना अधिक लेती है।
28.पिंजरा मोटर का शक्ति गुणक 0.7 से 0.8 के लगभग होता है।
29.पिंजरा मोटर मे दोष की सम्भावना कम होती है।
30. पिंजरा मोटर का प्रारम्भिक बलाघूर्ण कम तथा रनिंग बलाघूर्ण अच्छा होता है।
31.स्लिपरिंग मोटर की तुलना मे इसका शक्ति गुणक 0.8 से 0.9 के लगभग होता है।
32.स्लिपरिंग मोटर प्रारम्भिक धारा पूर्ण भार धारा का 2 गुना लेती है।
33.स्लिपरिंग मोटर का प्रारम्भिक बलाघूर्ण फुल लोड का तीन गुना होता है।
34.तुल्यकालिक गति एवं रोटर की गति का अन्तर को स्लिप कहते है।
35.जब प्ररेण मोटर का रोटर स्थिर होता है तब मोअर त्रिकलीय ट्रांसफॉर्मर की भांति कार्य करती है।
36.बलाघूर्ण का मान स्लिप पर निर्भर करता है।
37.निम्न स्लिप क्षेत्र मे बलाघूर्ण रेखीय होगा है।
38.उच्च स्लिप क्षेत्र मे मोटर लगातार घूम नहीं सकती है, इसलिए इसे अस्थिर क्षेत्र कहा जाता है।
39.मोटरिंग मोड जिसमे 0≤s≤1 स्लिप की इस परास, उत्पन्न बलाघुर्ण उसी दिशा मे होता है जिस दिशा मे रोटर घूम रहा है।
40.जब स्लिप का मान S >1 से ज्यादा होता तो मशीन ब्रेंकिग मोड मे कार्य करती है।
41.जब स्लिप का मान S शून्य से कम होता है तो इस मोड मे रोटर सुपर सिन्क्रोनस स्पीड पर रन करता है, जनरेटिंग मोड कहलाता है।
42.स्टार्टर मे चुम्बकीय कुण्डली एक लोह क्रोड परिनालिका पर लिपटी होती है, इसे शून्य भी विभव रिले कहते है।
43.(स्टार्टर प्रकार-
1.डायरेक्ट ऑनलाइन स्टार्टर(D.O.L.)
2.स्टार डेल्टा स्टार्टर
3.ऑटो ट्रांसफार्मर स्टार्टर
4.रियोस्टेटिक स्टार्टर)
44.D.O.L. स्टार्टर मे केवल अतिभार एवं शॉर्ट सर्किट सुरक्षा ही काम मे ली जाती है।
46.स्टार डेल्टा स्टार्टर यह मोटर को फुल वोल्टेज का 58.8 % पर ऑपरेट करता है।
47.रोटर प्रतिरोध नियंत्रण विधि में स्पिलरिंग मोटर की गति सामान्य गति से कम करने के लिए की प्रयोग की जाती है।
48.त्रिकला प्ररेण मोटर का विद्युत चुम्ब्कीय बलाघूर्ण सप्लाई वोल्टता के वर्ग के समानुपाती है।
49.स्टेटर वोल्टेज नियंत्रिण विधि में थायरिस्टर के फायरिंग कोण को परिवर्तित करके गति को नियंत्रित किया जा सकता है।
50.प्रेरण मोटर की गति सप्लाई आवृत्ति के सीधे अनुपात मे होती है।
51.असंतुलित धारा में ऋणात्मक क्रम घटक उपस्थित होते है।
52.अतिधारा रिले को एकल फेजिंग सुरक्षा के लिए उपयोग नही किया जाता है।
53.मोटर अधिकतम दक्षता जब प्राप्त होती है, जब चल हानियां, अचल हानियो के बराबर होती है।
54.प्रेरण मोटर विद्युत चुम्ब्कीय प्रेरण मोटर के सिद्धांत पर कार्य करती है।
55.ध्रुवों की संख्या परिवर्तित करके प्रेरण मोटर धूर्णीय गति को परिवर्तित नही किया जा सकता है।
56.रोटर की शॉफ्ट माइल्ड स्टील की बनी होती है।
57.प्रेरण मोटर की गति तुल्याकालिक गति से कम होती है।
58.थ्री फेज मोटर का शक्ति गुणक लगभग 0.8 पश्चगामी होता है।
59.तुल्यकालिक गति पर प्रेरण मोटर की स्लिप शून्य होती है।
60.प्रेरण मोटर के बलाघूर्ण स्लिप वक्र का आकार आयताकार पैराबोला होता है।
61.जब स्लिप एक होती है। तब मोटर र्स्टाट होने की अवस्था होती है।
62प्रेरण मोटर की गति आवृत्ति और पोलो की संख्या पर निर्भर करती है।
63.D.O.L स्टार्ट लाइन वोल्टेज को कम नही करता है।
64.कान्टैक्टर यह एक विद्युत चुम्बकीय युक्ति है।
65.प्राय: ऊष्मा चालित रिले है। यह द्विधात्विक युक्ति के द्वारा का परिपथ भंग करके मोटर को ऑफ
करती है।
करती है।
66.इन्चिंग सर्किट मोटर को अल्प समय के परीक्षण प्रचालन हेतु प्रयोग मे लाया जाना वाला सर्किट है, इसे जांगिग सर्किट भी कहते है।
67.चुम्बकीय ओवर लोड रिले की तुलना मे ऊष्मीय ओवरलोड रिले अधिक धीमी होती है।
68.ए.सी. रिले मे चैटरिंग दोष को शेडिड रिंग द्वारा दूर किया जा सकता है।
69.D.O.L स्टार्टर का प्रयोग 5H.P. तक मोटरो के लिए किया जाता है।
70.थ्री फेज इण्डक्शन मोटर के स्टेटर मे उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र तुल्यकालिक गति से घूमता है।
71.प्रेरण मोटर की गति तुल्यकालिक गति के बराबर होगी तो कोई घूमाव बल उत्पन्न नही होगा।
72.स्लिप=Ns- Nr/Ns
71.तुल्यकालिक गति Ns=120f/P
73.प्रतिशत स्लिप =Ns - Nr * 100/Ns
74. रोटर प्रतिबाधा प्रति फेज=√(R2 2+ X22)
75.रोटर धारा=E2 / √(R2 2+ X22)
76.रोटर का शक्ति गुणक=R2 / √(R2 2+ X22)
77.रोटर विद्युत वाहक बल=E2/E1=N2/N1
78.T=BHP x 60 x 735.5/2πNS
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