CHAPTER-5
SOLDERING AND BRAZING
1.सोल्डरिंग करने के लिए धातुओं के अनुसार फ्लक्स के अनुसार फ्लक्स प्रयोग किए जातें है।
2.कोरोसिव फ्लक्स में क्षार तथा तेजाब की मात्रा होती है।
3.नॉन करोसिव फ्लक्स में सुहागा, तारपीन का तेल और बिरोजा होता है।
4.खोखले पार्ट की निचली सतह की सोल्डरिंग के लिए स्ट्रेट सोल्डरिंग आयरन का प्रयोग किया जाता
है।
है।
5.ब्रेजिंग के लिए 600c0 की आवष्यकता है।
6.स्वंेटिग भी एक प्रकार की सोल्डरिंग है।
7.ब्रेजिंग के लिए सुहागा ही फ्लक्स से रूप में प्रयोग किया जाता है।
8.सोल्डर मुख्यतः लैड व टिन का एलॉय होता है।
9.सोल्डर का गलनांक बिन्दु 205c0 होता है।
10.फ्लक्स का मुख्य कार्य जोडे जाने वाली सतह को ऑक्सीडेषन से बचाने तथा सोल्डर को पिघलाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
11.ब्रेजिंग के सिल्वर सोल्डर या स्पेल्टर प्रयोग किया जाता है।
12.ब्रेजिंग के लिए प्रयोग किए जाने वाले स्पेल्टर या सिल्वर एलॉय सिल्वर, तांबा, जिंक, निकिल का
मिश्रण होता है।
मिश्रण होता है।
13.कार्बाइड टिप टूल की शैक हाई कार्बन स्टील की बनी होती है।
14.स्पेल्टर का गलनांक बिन्दु 620c0 से 850c0 तक होता है।
15.सोल्डरिंग केवल पती शीटों के लिए की जाती है।
16.सॉफ्ट सोल्डर 450c0 से कम तापमान पर की जाती है।
17.सोल्डरिंग करने के लिए सबसे पहले टिनिंग किया जाता है।
18.स्पेल्टर का गलनांक 600c0 होता है /
19.सोल्डर में टिन व लैड का अनुपात 60:40 होता है।
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