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SINGLE PHASE MOTOR

                                                      CHAPTER-2
                                  एककलीय मोटर(SINGLE PHASE MOTOR)
1.Singal phase motor की रेटिंग फ्रेक्शटन किलोवाट मे होती है।
2.द्विघूर्णन क्षेत्र सिद्धांतफेरासिस सिद्धांत पर आधारित है।
3.बलाघूर्ण उत्पन्न होने की विधि की सही व्याख्या  क्रॉस क्षेत्र सिद्धांत द्वारा की जाती है।
4.रोटर धारा द्वारा उत्पनन्नन क्षेत्रस्टेयटर धारा द्वारा उत्पेन्न क्षेत्र के लम्बवत् होता है। उसे क्रॉस क्षेत्र कहते है।
5.क्रॉस क्षेत्र का प्रभाव तब तक होता है। जब तक रोटर घूम रहा है तथा इसकी शक्ति रोटर गति के समानुपाती होती है। 
6.तुल्यका‍लिक गति के पासक्रॉस क्षेत्र की शक्तिस्टेटर क्षेत्र के लगभग बराबर होती है।
7.Singal phase motor मे उत्प न्नघूर्णी चुम्बककीय क्षेत्र का परिमाणत्रिकलीय प्रेरण मोटर की तरह स्थिर नही रहता है।
8.स्प्ल्टि फेज मोटर को रजिस्टेन्सन स्टार्ट इण्डकक्शेन रन मोटर भी कहते है।
9.स्प्ल्टि फेज मोटर मे दोनो वाइन्डिग एक-दूसरे से 90 डिग्री इलेक्ट्रिकल दूरी पर रखी जाती है।
10.जब रोटर की गति 75% से 80% हो जाती है तो सेन्ट्रीरफ्यूगल स्विच की सहायता से सहायक वाइन्डिग का परिपथ देती हैमोटर रनिंग वा‍इन्डिग पर चलती रहती है।
11.Singal phase motor मोटर कैपेसिटर के लगाने से मोटर का स्टा्र्टिंग टॉर्क बढ जाता है और मोटर लोड पर स्टार्ट हो जाती है।
12.मोटरो मे कैपेसिटर अपघटनी प्ररूपी (Electrolstic type) होता है। यह एक घण्टेत मे 20 चक्र से अधिक परिचालन नही करता है।
13.स्टार्टिंग कैपेसिटर का मान 80μf से 200μf के बीच होता है।
14.शेडिड पोल मोटर मे पोलो के सिरो पर शेडिंग रिंग लगाकर फेज को विभाजित करके प्रारम्भिधक बलाघूर्ण  उत्पन्न किया जाता है।
15.शेडिड पोल मोटर ये बहुत कम हॉर्स पावर की बनायी जाती हैइनका उपयोग जहा
कम प्रारम्भिक बलाघूर्ण की आवश्यकता होती है।
16.शेडिड पोल मोटर का रोटर पिंजरा प्ररूपी होता है।
17.शेडिड पोल मोटर की घूर्णन दिशा बिना मुख्यत: पोल से शेडिड पोल की ओर घूमती है।
18.फ्रेक्शोन हॉर्स पावर मोटरो के लिए वोल्टे ज रेटिंग 1.5 वोल्ट होती हैतथा फ्रेक्शनल मोटरो की रेटिंग 115/230 वोल्ट  होती है।
19.प्रतिकर्षण मोटर एक पूथक अस्तिव वाली मोटर है।
20.प्रतिकर्षण मोटर का रोटर D.C. मशीन के तरह वाउण्ड  किया होता है।
21.प्रतिकर्षण प्रेरण मोटर का क्षरण प्रतिघात नगण्य् होता हैमोटर इकाई शक्ति गुणक पर चलती है।
22.प्रतिकर्षण मोटर समान ध्रुवो के मध्यत प्रतिकषर्ण के सिद्धांत पर कार्य करती है। 
23.स्टेपर मोटर का उपयोग कम्‍प्‍यूटर उपकरणों मे ड्राईंविग बलाघूर्ण उत्पन्न  करने के लिए किया जाता है।
24.स्टेपर मोटर मे मल्टी पोल तथा मल्टीफेज वा‍इन्डिग स्थापित की जाती है इसका रोटर खांचेदार स्टे्पर होता है।
25.स्टे‍पर मोटर का रोटर स्थाययी चुम्‍‍बक या परिवर्ती रिलक्टेान्सी प्रकार या फैरो-चुम्ब्कीय पदार्थ का बना होता है।
26.स्टे‍पर मोटर को बाहरी ड्राइव लोजिक सर्किट की मदद से ऑपरेट की जाती है।
27.स्टे‍पर मोटर एक पद मे एक यर्थात् कोणीय दूरी तय करती है।
28.स्टे‍पर मोटर की गति लोड पर निर्भर नही करती हैपूरी तरह पद पल्स  की आवृत्ति पर निर्भर करती है। एक यथार्थ खुला लूप गति निंत्रण संयंत्र देती है।
29.स्टे‍पर मोटर मे प्रयोग किए जाने वाले पद 2, 2.5, 7.5, या 150 डिग्री प्रति पल्स् होती है।
30.स्टे‍पर मोटर का रोटर स्लेएविंग या स्लूर मोड मे तेज गती से घूमता है इस मोड मे कदमो की दर अधिक रखी जाती है।
31.रिलक्टेन्स मोटरएककलीय तुल्य‍कालिक मोटर है। इसकी गति स्थिर होती है।
32.रिलक्टेन्स मोटर अपनी स्थिर गति पर आंशिक लोड ही वहन करेगी।
33.हिस्टेरेसिस मोटर एककलीय तुल्य्कालिक मोटर है। 
34.हिस्टेरेसिस मोटर शेडिड ध्रुव सिद्धांत पर कार्य करती है।
35.हिस्टेरेसिस मोटर का रोटर चिकने बेलनाकर क्रोम स्टीतल का बना होता है।
36.यूनिवर्सल मोटर या एककलीय सिरीज मोटर जो ए.सी. व डी.सी. दानो पर कार्य करती है।
37.यूनिवर्सल मोटर आंशिक हॉर्स पावर की बनाई जाती है यह उच्च प्रारम्भिक बलाघूर्ण रखती है।
38.यूनिवर्सल मोटर की गति तुल्यपकालिक गति से कई गुणा अधिक होती है।
39.यूनिवर्सल मोटर एक दिशीय बलाघूर्ण उत्पकन्ने करती है।
40.यूनिवर्सल मोटर की गति ए.सी. साइड पर कार्य करते समय क्रान्तिक सीमा के अन्दर ही होती है।
41.यूनिवर्सल मोटर की गति 3600 से 25000 R.P.M. तक व उच्चा पावर आउटपुट देती है।
42.एक हॉर्स पावर मोटर से कम की रेटिंग की मोटर को फ्रेक्शपनल हॉर्स पावर मोटर कहलाती है।
43.एककलीय मोटर को स्व चालित बनाने की विधि-फेज सिप्ट्ल विधिकैपेसिटर विधि आदि।
44.घरेलू मिक्स र मे यूनिवर्सल मोटर का उपयोग किया जाता है।
45.रेल्वे इंजन यूनिवर्सल मोटर की क्षमता 2200 H.P. हॉर्स पावर तक की बनाई जाती है।
46.शेडेड पोल मोटर की घूर्णन दिशा को सुगमता से परिवर्तित नही किया जा सकता है।
47.घूर्णी चुम्बटकीय क्षेत्र स्थापित करने के लिए दो फेजो की आवश्यरकता होती है।
48.अपकेन्द्री्य स्विच को एण्डथ कवर पर स्था पित किया जाता है।
49.Singal phase कैपेसिटर मोटर मे मुख्यक तथा सहायक वाइन्डिग होती है।
50.छत के पंखो मे स्था यी कैपेसिटर मोटर प्रयोग की जाती है।
51.कैपेसिटर स्टांर्ट प्रेरण मोटर की दक्षता कैपेसिटर स्टाजर्ट-कैपेसिटर रन प्रेरण मोटर की तुलना मे कम होती है।
52.सिंगल फेज कैपेसिट मोटर की घूर्णन दिशा परि‍वर्ति करने मुख्य‍ वा‍इन्डिग या सहायक वा‍इन्डिग का संयोजन बदल देना चाहिए।
53.कैपेसिटर स्टा्र्ट मोटर का शक्ति गुणक 0.8 पश्च गामी होता है।
54.कैपेसिटर मोटर का प्रयोग घरेलू रेफ्रिजरेटर किया जाता है।
55.यूनिवर्सल मोटर का प्रयोग विद्युत शंविग मशीन मे किया जाता है।
56.Singal phase का प्रारम्भिक बलाघूर्ण लगभग शून्यय होता है।
57.यूनिवर्सल मोटर की न्यूातम क्षमता 1/200 H.P. है।
58.शेडिड पोल मोटर मे शेडिंग रिंग का प्रयोग घूर्णीय चुम्ब0कीय क्षेत्र उत्प न्न  करने के लिए किया जाता है। 
59.Singal phase मोटर को स्टागर्ट के करने की सबसे सस्तीय विधि कैपेसिटर स्टागर्ट विधि है।
60.कैपेसिटर प्रारम्भो मोटर मे कैपेसिटर सहायक वाइन्डिग व अपकेन्द्री  स्विच के श्रेणी क्रम मे जोडा जाता है।
61.सिंगल फेज मोटर का रोटर पिंजरा प्रकार होता है। यह विद्युत चुम्बककीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
62.हिस्टेकरेसिस मोटर की रोटेशन की दिशा मुख्य ध्रुव के सापेक्ष शेडेड पोल की स्थिति पर निर्भर करती है।
63.रिलक्टेरन्सि मोटर मे बलाघूर्ण हिस्टे्रेसिस हानियों द्वारा विकसित किया जाता है।
64.कैपेसिटर स्टार्ट मोटर और कैपेसिटर रन मोटर 25% अधिक लोड पर पूर्ण दक्षता के साथ चलती है।
65.शेडिड पोल मोटर की दक्षता 5-35% तक होती है।
66.स्थाडयी कैपेसिटर मोटर का टार्क लगभ स्टानर्टिंग व रनिंग टार्क के समान होता है।
67.यूनिवर्सल मोटर की घूर्णन गति लोड व्यु्त्क्रोमानुपाती होती है।
68.सिंगल फेज स्लिप रिंग इंडक्शिन मोटर मे घूर्णन दिशा परिवर्तित करने की कोई व्यवस्था नही होती है।
69.स्टेथपर मोटर का रोटर बेलनाकार होता है। इसलिए इसे यूनीपोलर मोटर भी कहते है।
70.कैपेसिटर मतोटर का टार्कस्प्लिट फेज मोटर्स के टार्क से 2.5 से 4.5 गुना तक होता है।
71.एक सचल विद्युत ब्लोाअर मे सामान्य्त: धारिता चल मोटर का प्रयोग किया जाता है।
72.रिलक्टें स मोटर मे प्राय: ध्रुव होते है।
73.यूनिवर्सल मोटर का प्रयोग खिचांव कार्यो के लिए किया जाता है।
74.थायरिस्टलर या SCR का प्रयोग करके यूनिवर्सल मोटर की घूर्णन गति को नियंत्रित किया जा सकता है।
75.लोड परिवर्तन के कारण किसी मोटर की घूर्णन गति परिवर्तित होना गति रेगुलेशन कहलाता हैयदि यह परिवर्तन बहुत कम या शून्य  हो तो गति रेगुलेशन अच्छाश माना जाता है।
76.पंखों मे से 2.5μf तक का कैपेसिटर प्रयोग किया जाता है।
77.कैपेसिटर स्टार्ट-कैपेसिटर रन मोटर का प्रारंभिक घुमाव बल उसके रनिंग घुमाव बल का तीन गुना तक होता है।
78.प्रतिकर्षण मोटर की घूर्णन गति ब्रुशो पर निर्भर करती हैब्रुशो को ध्रुवो की अक्ष से 20 डिग्री  आगे रखी जाती है। 20 डिग्री पर ही मोटर की गति अधिकतम होती है।
79.प्रतिकर्षण मोटर मे 
80.स्प्लिट फेज इण्डमक्शिन मोटर 0.5 H.P. हॉर्स पावर तक की बनाई जाती है।
81.शेडिड पोल मोटर 125 वाट क्षमता की बनाई जाती है।
82.प्रतिकर्षण मोटर निम्नप्रारम्भिक धारा लेती है।
83.यूनिवर्सल मोटर की बनावट डी.सी. सिरीज मोटर की तरह होती है।
84.रिलक्टें स मोटर का रोटर नर्म लोहे का बना होता है।
85.सिंगल फेज इण्डंक्श न मोटर मे शून्यो लोड धारा का मान पूर्ण लोड धारा के मान की 40 प्रतिरशत होता है।
86.स्टे पर मोटर का प्रचालन डिजिटल संकेत द्वारा किया जाता है।
87.यूनिवर्सल मोटर को नो लोड पर प्रचालित किया जाता हैतो उसकी धूर्णन गति घर्षण के कारण घट जाती है।
88.यूनिवर्सल मोटर मे कम्यूटेटर  सैगमेन्ट्स की चौडाई एवं ब्रुश की चौडाई का अनुपात 1:2 होता है।
89.हिस्टेतरेसिस मोटर कम शोर के साथ प्रचालित होती है।
90.प्रतिकर्षण मोटर की गति नो लोड पर अत्यथधिक उच्चह हो जाती है।
91.शेडिड पोल मोटर की शेडिंग रिंग कापॅर की बनी होती है तथा क्वाइल आपस मे शार्ट होती है। 
92.हिस्टेपरेसिस मोटर का पावर फैक्टर निम्न होता है।
93.यूनिवर्सल मोटर की शाफ्ट माइल्ड्  स्टीनल की बनी होती है।



Comments

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