Skip to main content

POLY-PHASE ELCTRIC SYSTEM

                                                                      CHAPTER-11
                                                     (POLY-PHASE ELCTRIC SYSTEM)
1.डेल्टा कनेक्षन में सिंगल फेज की वाइन्डिग टूटी हुयी हो तों ये ओपन डेल्टा कनेक्षन कहलातें है।
2.फेज वोल्टेजलाइन व स्टार प्वाइन्ट के मध्य मापी जाती है।
3.जब पावर फैक्टर 0.5 से ऊपर हो तब दोनों वाट-मीटर पोजिटिव पाठ्यांक देगें।
4.दो एक समान रेजिस्टेन्स जिनकी प्रेषर क्वॉइल के रेजिस्टेन्स बराबर हो के जोडकरस्टार प्वांइट   बनाकर नयूट्रल प्राप्त करतें है।
5.डेल्टा कनेक्षन में फेज वोल्टेज लाइन वोल्टेज के बराबर होती है।
6.डेल्टा कनेक्षन में लाइन करंट फेज करंट का √3 गुणा होता है।
7.स्टार कनेक्षन में लाइन वोल्टेज फेज वोल्टेज का √3 गुणा होता है।
8.ए.सी. परिपथ का तुलनात्मक परिपथ Z=1/√G2+B2       होता है।
9.थ्री फेज परिपथ में असन्तुलित लोड में प्रत्येक फेज का पावर फैक्टर भिन्न-भिन्न होता है।
10.थ्री फेज सन्तुलित लोड कनेक्षन में न्यूट्रल तार में करन्ट शून्य होता है।
11.दो वाट मीटर विधि द्वारा पावर नापते समय फेज कोण θ=tan-1 √3(W1-W2)/ W1+W2 होता है।
12.शुद्ध केपेसिटिव परिपथ वोल्टेज से करन्ट 900 आगे रहती है।
13.वाट-मीटर पाठ्यांक औसत मान देते है।
14.पावर ज्ञात करने का सूत्र P=√3.VL.IL.COSØ है।
15.सन्तुलित थ्री फेज प्रणाली में पावरफेज पावर के तीन गुणा होती है।
16.सप्लाई में कोणीय विस्थापन 1200 इलेक्ट्रीकल होता है।
17.फेज वोल्टेज को लाइन व न्यूट्रल के बीच मापी जाती है।
18.दो वाट-मीटर विधि में कुल पावर W= W1+W2            
19.थ्री फेज असंतुलित लोड में पावर हेतु तीन वाट-मीटर विधि अपनायी जाती है।
20.पावर फैक्टर वोल्टेज और करन्ट के बीच tangent होता है।
26.जब तीन फेज परिपथ संतुलित होता है तो न्यूट्रल में धारा शुन्य होती है।
27.एक तीन फेज परिपथ में यदि भार का शक्ति गुणक घटता है तो लाइन कंरट में वृद्धि होती है।
28.जब एक फेज मोटर के पैरलल मंे एक संधारित्र जोड जाता है तो मोटर द्वारा ली गई वास्तविक शक्ति में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
29.एक तीन फेज असन्तुलित भार पर प्रत्येक फेज का शक्ति गुणक अलग-अलग होता है।
30.फेज अनुक्रम बदलने से मोटर के घूमने की दिषा बदल जाती है।
21.अधिकतर थ्री फेज सप्लाई के कनेक्षन स्टार व डेल्टा में होते है।
22.न्यूट्रनस्टार कनेक्षन में प्राप्त करतें है।
23.एक तीन फेज प्रणाली में तात्क्षणिक फेज वोल्टताओं का बीज गणितीय योग का मान शुन्य होता है।
24.किसी तीन फेज प्रणाली में जब सभी फेजों में प्रतिबाधा व शक्ति गुणक समान हो तो तीन फेज भार संतुलित कहलाता है।
25.एक तीन फेज परिपथ में वास्तविक शक्ति अनुमानित शक्ति से अधिक नहीं होती है।


Comments

Popular posts from this blog

METALS

                                                                  CHAPTER-3                                                                 धातुएं (METALS) 1.(INTRODUCTION)=   धातुएं धातु खनिज पदार्थ होते है। जो प्रकृति से अयस्कों के रूप में प्राप्त होते है। असस्कों से धातुओं से प्राप्त करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रक्रमों से गुजरना पडता है जिससे अयस्क में से धात्विक तथा अधात्विक पदाथ्र पृथक् हो जाते है। 2. धातुओ के गुण (PROPERTIES OF METALS)= 1. भौतिक गुण (PHYSICAL PROPERTIES)= 1. रंग (COLOUR)= प्रत्येक ध...

MACHINE CONTROL PANEL

CHAPTER-1 (MACHINE CONTROL PANEL) 1. वह युक्ति जिसके माध्‍यम से विभिन्‍न मशीनो या युक्तियो मे विद्युत प्रवाह को नियंत्रित किया जाता है कंट्रोल पैनल कहलाता हैं। 2. कंट्रोल पैनल मे प्रयोग कियो जाने वाले स्विचों की परास, नियंत्रित की जाने वाली मोटर क्षमता पर निर्भर करती है। 3. कंट्रोल पैनल का आकार नियंत्रित की जाने वाली मशीनों की संख्‍याय पर निर्भर करता है। 4. कंट्रोल पैनल के भाग-1.वॉल माउन्टिड                    2.फ्री स्‍टेन्डिंग, सिंगल फ्रन्‍ट, विथ फ्रन्‍ट एक्‍सेस ओनली                    3.फ्री स्‍टेन्डिंग, सिंगल फ्रन्‍ट, विथ एक्‍सेस फ्रोम द फ्रन्‍ट एन्‍ड रिअर                    4.फ्री स्‍टेन्डिंग डबल फ्रन्‍ट                ...

COMMON HAND TOOLS

CHAPTER-2   COMMON HAND TOOLS 1. पेंचकस   का साईज का निर्धारण इनके ब्लेड के आधार पर किया जाता है। 2. पेचकस का वह भाग जो हार्ड व टैम्पर किया हुआ भाग बिट कहलाता है। 3. इलैक्ट्रिषियन के कार्य में उपयोग होने वाले पेचकस का हैण्डिल सेल्यूलोज से बना होता है। 4. किसी कार्य विषेष के लिए पेचकस का चयन पेच का साइज के अनुसार किया जाता है। 5. एक इलैक्ट्रिषियन के कार्य में सबसें अधिक उपयोग इन्सुलेटिड कम्बीनेषन प्लायर होता है। 5. काम्बीनेषन प्लायर के साईज का जबडे के सिरे से हैण्डिल के अन्त सिरे तक निर्धारण किया जाता हैं। 6. प्लायर के दोनों जबडे रिवेट से जुड रहते है। 7. प्लायर को जाच हाने पर इसे खोलने के लिए मोबाइल आयल डालना चाहिये। 8. सामान्य साईड कटिंग प्लायर का साइज   15cm  होता है। 9. लकडी के बोर्ड में पेच कसने से पूर्व ब्राडल का उपयोग करना चाहिये । 10. फेज टेस्टर का उपयोग फेज चेक करने के लिए किया जाता है। 11. फेज टेस्टर में लगा लैम्प नियोन लैम्प होता हैं। 12. फेज टेस्टर का उपयोग   500watt  से अधिक प्रदाय पर नहीं करना चाहिय। 13. एक बा...