CHAPTER-5
औद्योगिक एवं घरेलू वायरिंग (INDUSTRIAL AND DOMESTIC WIRING)
1.किसी भवन, कार्यालय आदि में विद्युत शक्ति की उपभोग की सुविधा उपलब्ध करवाना ही विद्युत वायरिंग कहलाता है।
2.विद्युत वायरिंग की स्थापना करते समय पूर्ण सुरक्षा गुणांक एवं भारतीय विद्युत नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
3.वैद्युतिक वायरिंग की स्थापना एवं उसका मरममत कार्य किसी लाइसेंस-धारी ठेकेदार से ही कराया जाना चाहिए।
4.वैद्युतिक वायरिंगं में प्रयुक्त सहायक सामग्री I.S.I. चिन्ह युक्त हानी चाहिए।
5.वैद्युतिक वायरिगं को उप-परिपथों में विभक्त किया जाना चाहिए और लाइट-एण्ड-फैन तथा पावर के लिए पृथक्-पृथक् उप-परिपथ तैयार किए जाने चाहिए।
6.लाइैट-एण्ड फैन के प्रत्येक उप-परिपथ में 10 से अधिक और पावर के प्रत्येक उप-परिपथ में 2 से अधिक उपभोग बिन्दु नहीं होने चाहिए।
7.लाइट-एण्ड फैन उप-परिपथ का कुल लोड 800 W वॉट और पावर उप-परिपथ का कुल लोड 3000 W वॉट से अधिक नहीं होना चाहिए।
8.लैम्प 60W, सॉकेट 100W, फ्लोरसैंट ट्यूब 40W, छत का पंखा 60W, मरकरी वेपर लैम्प 80W, पावर सॉकेट 1000W
9.नियंत्रक स्विच बोर्ड की फर्ष से ऊचांई 1.3 मीटर होनी चाहिए। और प्रवेष द्वारा के निकट बाई ओर स्थापित किया जाना चाहिए।
10.स्नानघर के अन्दर स्विच स्थापित करना आवष्यक हो तो वह पूर्णतया water proof होना चाहिए।
11.घर के बाहर स्थापित सभी लाइट-प्वॉइन्ट, जलरोधी प्रकार के होने चाहिए।
12.सॉकेट सामान्यतः 3-पिन वाला ही स्थापित किया जाना चाहिए और उसका अर्थिंग पिन आवष्यक रूप से अर्थ किया जाना चाहिए।
13.लाइट एण्ड फैन परिपथ में 5 तथाय पावर परिपथ में 15A 240V रेटिंग वाला सॉकेट स्थापित किया जाना चाहिए।
14.छत के पंखों के ब्लेड्स तथा फर्ष के बीच न्यूनतम 2.4 मीटर और अधिकतम 3 मीटर अन्तर पर स्थापित किया जाना चाहिए।
15.सभी प्रकार की लाइटों की फर्ष से ऊचांई 2.25 मीटर से कम नही होनी चाहिए।
16.अर्थ चालक में कोई फ्यूज या स्विच आदि संयोजित नहीं किया जाना चाहिए।
17.फेज चालक या लाइव चालक में फ्यूज लगाया जाना चाहिए। और सभी प्रकार की नियंत्रक युक्यिां इसी चालक पर स्थापित की जानी चाहिए।
18.प्रत्येक उप परिपथ का वितरण बोर्ड पृथक् होना चाहिए।
19.लीकेज करंट का मान परिपथ की कुल करंट के 1/5000 वे भाग से सदैव कम होना चाहिए।
20.लाइट एण्ड फैन तथा पावर वैद्युतिक वायरिंग की स्थापना भारतीय विद्युत अधिनियम 1956 के अन्तर्गत की जानी चाहिए।
21.85 के अतंर्गत षिरोपरि लाइन में दो पोल्स के बीच 67 मीटर से अधिक दूरी नहीं होनी चाहिए।
22.भारतीय विद्युत नियम 31 व 32 के अनुसार फेज तार व पोजीटिव तार पर फ्यूज कट आउट व
न्यूट्रल तार पर न्यूट्रल लिंक लगाना अति आवष्यक होता है।
न्यूट्रल तार पर न्यूट्रल लिंक लगाना अति आवष्यक होता है।
23.बिजली के खम्भों पर से घर तक मीटर बोर्ड तक आने वाली तार सर्विस लाइन कहलाती है।
24.प्रत्येक कक्ष की वायंरिंग में MCB प्रकार का स्विच प्रयोग किया जाना चाहिए।
25.किसी भी प्रकार की वायरिंग की स्थापना के लिए सर्वप्रथम ले-आउट तैयार करना आवष्यक होता है।
26. P.V.C. केसिंग-केजिंग वायरिहंग में स्लॉटेउ रनेज्ड-काउन्टर संक हैड प्रकार के वूडन स्क्रू प्रयोग
करना चाहिए।
करना चाहिए।
27.केबल की लचक तथा तनन सामर्थ्य बढाने के लिए उन्हें अनेक तारो एंेठकर बनाया जाता है।
28.फ्यूज का कार्य, विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित हैं
29.जीवित तार सदैव स्विच से संयोजित किया जाता है।
30.जब बैटन की लम्बाई बढानी हो तों उसमें स्ट्रेट जोड विधि का प्रयोग की जाती है।
31.क्लीट्स पोर्सलीन से निर्मित होती है।
32.ट्यूब लाइट की भीतरी दीवार प्रतिदीप्तिपूर्ण से आलेपित होती है।
33.जीने की वायरिंग में प्रयुक्त स्विच, द्वि-मार्गी प्रकार के होते है।
34.ICTP का अर्थ है। आयरन कबर्ड ट्रिपल पोल स्विच।
35.वायरिंग की लूपिंग विधि का उपयोग सामान्यतः घरेलू वायरिंग के लिए किया जाता है।
36.कोड के अनुसार न्यूट्रल लाइन के लिए केबल का रंग काला होना चाहिए।
37.यदि किसी वैद्युतिक स्थापना में गम्भीर शार्ट-सर्किट दोष हो तों मैगर से परीक्षण करने पर
1MΩदर्षाएगा।
1MΩदर्षाएगा।
38.धुएं, अम्ल तथा क्षार का प्रभाव लैड शीथड तार पर नगण्य होता है।
39.यदि किसी ट्यूब लाइट परिपथ में चोक संयोजित न की जाए तो वह फ्यूज हो जाएगी।
40.आपूर्ति लाइन के आर-पार एक संधारित्र संयोजित किया जाता है। शक्ति गुणक का सुधारने के लिए।
41.उप परिपथ में तांबे के चालक की न्यून्तम अनुप्रस्थ काट 1.5 मिमी2 होनी चाहिए।
42.कन्ड्यूट पाइप प्रकार की यांत्रिक सुदृढता और अग्नि सुरक्षा महत्वपूर्ण कारक हो तो वायरिंग कन्ड्यूट पाइप प्रकार की हानी चाहिए।
43.ब्रिटनिया जोड सिरोपरी लाइन में प्रयुक्त किया जाता है।
44.कन्सील्ड वायरिंग में स्विच बाक्ॅस से सैडल को 30 सेमी. की दूरी पर स्थापित करना चाहिए।
45.इण्टरमीडिएट स्विच में मूलतः चार संयोजन बिन्दु तथा दो संयोजन शैलियॉं होती है।
46.RYB 3-फेज लाइन का रंग क्रम होता है।
47.वैद्युतिक वायरिंग मंे नियॉन टैस्टर द्वारा परीक्षण ओपन-सर्किट परीक्षण कहलाता है।
48.क्षैतिज तथा ऊर्ध्व कण्ड्यूट वायरिंग में दो सैडल्स के बीच अधिकतम 60 सेमी दूरी उपयुक्त होनी
चाहिए।
चाहिए।
49.वर्कषॉप वायरिंग में भारी गेज कण्ड्यूट का प्रयोग किया जाता है।
50.मैगर के डायल पर पैामने का परास अनन्त से शून्य तक होता है।
51.एक कंक्रीट दीवार तथा छत पर पेंच लगाने के रावल प्लग टूल का प्रयोग करतें है।
52.सामग्री और केबिल के अनुमान के लिए अधिक उपयोगी आरेख वायरिंग आरेख और परिपथ आरेख होगा।
53.शीतलन कक्ष में PVC बैटन वायरिंग का प्रयोग किया जाता है।
54.हाउस वायरिंग में अर्थिंग तार के रूप 14mm कापॅर तार का प्रयोग किया जाता है।
55.धारा परिपथों के लिए निर्धारित दूरी के भीतीर जोडों को सरकाना है। वह एरियल जोड का प्रयोग करतें है।
56.क्लीट वायरिंग अस्थायी उद्धेष्य के लिए की जाती है।
57.मैगर की कार्यविधि मूविंग क्वॉयल मीटर पर आधरित होती है।
58.सर्फेस कन्ड्यूट वायरिंग में सैडल्स के बीच की दूरी 1.0 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
59.केबिल की धारा वहन क्षमता तारों की मोटाई, तारों की संख्या पर निर्भर करती है।
60.केसिंग केपिंग वायरिंग तेजी से नमी को उवषोषित करती है।
61.प्रत्येक भवन मेंवैद्युतिक वायरिंग की स्थापना के लिए अर्थ अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाना चाहिए।
62.धरो की वायरिंग समानान्तर क्रम होती है।
63.जब दो आवेषित चालकों को जोडा जाता है। तब आवेष का प्रवाह नहीं होगा, यदि विभव एकसमान है।
64.लीड शीथ्ड केबल जिसकों अर्थ करना आवष्यक होता है।
65.बस-बार वायरिंग से किसी बहुमंजिले भवन के पंचम तल संयोजन हेतु, त्रि-फेज प्लग इन बॉक्स प्रयुक्त साधन है।
66.किसी वैद्युतिक लाइन की ओरवरलोड/षॉर्ट-सर्किट अवस्था में उसे स्वतः ही ऑफ कर देने वाली
युक्त सर्किट ब्रेकर कहलाती है।
युक्त सर्किट ब्रेकर कहलाती है।
67.वायरिंग की लूपिंग प्रणाली में पूर्ण वैद्युतिक परिपथ का इन्सुलेषन प्रतिरोध उच्च रहता है।
68.जिस सर्किट ब्रेकर में कोई अनुरक्षण योग्य पुर्जा नहीं होता है, वह मिनिएचर सर्किट ब्रेकर कहलाता है।
69.यान्त्रिक आघात से सुरक्षा के लिए भूमिगत प्रकार के केबिल में जालीदार कवच लगाना चाहिए।
70.400 एम्पियर धारा वहन क्षमता की षिरोपरि बस-बार, 2.44मी. लम्बाई में उत्पादित की जाती है।
71.कण्ड्यूट पाइप वायरिंग में कण्ड्यूट पाइप का आन्तरिक व्यास 16 से 65 मिमी तक होता है।
72.आयरन कण्ड्यूट पाइप को अर्थिंग लाइन की भॉंति प्रयोग नहीं करना चाहिए।
73.भूमिगत कण्ड्यूट पाइप वायरिंग को कन्सील्ड वायरिंग, डक्ट वायरिंग के नाम से भी जाना जाता है।
74.सर्किट ब्रेकर नियन्त्रक युक्ति है।
75.भारतीय विद्युत नियम 88 के अनुसार, सभी प्रकार की षिरोपरि लाइन पर अर्थ किया हुआ गार्ड
लगाना आवष्यक है।
लगाना आवष्यक है।
76.एक अच्छी अर्थिंग का प्रतिरोध निम्न होना चाहिए।
77.कण्ड्यूट पाइप को काटने के बाद उसके बर्र को रीमर से हटा देना चाहिए।
78.कण्ड्यूट पाइप के सिरों पर लकड की बुषिंग्स प्रयोग की जाती है।
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