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ILLUMINATION

                     CHAPTER-7    
                प्रदीपन(ILLUMINATION)



1.प्रदीपन एक प्रकाश विकिरण ऊर्जा का ही रूप है जिसे f=vλसे व्‍यक्‍त करते है।
2.विद्युत चुम्‍बकीय  या प्रकाश तंरग का वेग 3*10 मी/से. होता है।
3.प्रकाश तरंग की लम्‍बाई की इकाई एंगस्‍ट्रॉम ली गई है। जिस प्रदर्शित करते है।
4.प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है जो जो हमारी आखों को वस्‍तुओं का बोध कराती है।
5.वैद्युतिक ऊष्‍मक तंतु को 9000C से अधिक के तापमान पर गर्म किया जाता है।
6.ऊष्‍मक तंतु का गलनांक उच्‍च होना चाहिए।
7.सूर्य का श्‍वेत प्रकाश सात विभिन्‍न रंगो से मिलकर बना है।
8.प्रकाश विकिरण ऊर्जा, विद्युत तरंगो के रूप मे गति करता है।
9.दृश्‍य प्रकाश वर्ण क्रम 380mm और 760mm के बीच का भाग होता है जो मनुष्‍य की आंख के लिए सुग्राही होता है।
10.एक नैनो मीटर वह तरंग लम्‍बाई है जो एक मिलिमीटर का दस लाख वां भाग होता है।
11.बैगनी रंग की तरंगदैर्ध्‍य 380*10 मी. होती है, यह सबसे कम तरंगदैर्ध्‍य होती है।
12.लाल रंग की तरंगदैर्ध्‍य 760*10 मीटर होती है, यह सबसे अधिक तरंगदैर्ध्‍य होती है।
13.विकिरण दक्षता  प्रकाश के रूप मे विकिरित ऊर्जा/पिण्‍ड द्वारा सम्‍पर्ण विकिरित ऊर्जा
14.प्रकाश स्‍त्रोत द्वारा किसी दी हुई निश्चित दिशा मे प्रति इकाई घन कोण उत्‍सर्जित ल्‍यूमेन की संख्‍या को उसकी कैण्‍डल पावर कहते है।
15.कैण्‍डल पावर=ल्‍यूमेन/ω
16.प्रकाश स्‍त्रोत द्वारा किसी दी हुई दिशा मे प्रति इकाई घन कोण मे विकिरित ज्‍योतीय फ्लक्‍स को   उसकी ज्‍योतीय तीव्रता कहते है। इसे I प्रदर्शित करते है।
17.ज्‍योतीय तीव्रता किसी प्रकाश स्‍त्रोत या प्रदीप्ति सतह को दी हुई दिशा मे प्रकाश विकिरण की क्षमता है।
18.ज्‍योतीय तीव्रता=ल्‍यूमेन/स्‍टेरेडियन, इकाई कैण्‍डला होती है।
19.किसी ज्‍योतीय पिण्‍ड से प्रति सैकण्‍ड प्रकाश तरंगो के रूप मे विकिरित ऊर्जा को ज्‍योतीय फलक्‍स कहते है। इसे f प्रदर्शित करते है।
20.ज्‍योतीय फलक्‍स की इकाई ल्‍यूमेन है।
21.कैण्‍डल मानक स्‍त्रोत 4π ल्‍यूमेन फ्लक्‍स उत्‍पन्‍न करता है।
22.एक ल्‍यूमेन फ्लक्‍स का मान लगभग 0.0016 वाट के बराबर होता है।
23.यदि स्‍त्रोत एक कैण्‍डल शक्ति का है तो सम्‍पूर्ण ज्‍योतीय फ्लक्‍स    होगा।
24.किसी तल पर प्रकाश कि किरणें पडने पर वह प्रकाशित हो जाता है, तल के इकाई क्षेत्रफल पर पडने वाले प्रकाश की तीव्रता को उसकी प्रदीप्ति या प्रदीपन कहलाती है।
25.प्रदीप्‍त की इकाई लक्‍स या ल्‍यूमेन प्रतिवर्ग मीटर या मीटर कैण्‍डला मे मापा जाता है।
26.दो सरल रेखाओ को एक ही तल मे एक ही बिन्‍दु पर मिलाने पर उनके मध्‍य बने कोण को समतल कोण कहते है।
27.समतल कोण=चाप/त्रिज्‍या
28.समतल कोण का अधिकतम मान 2πरेडियन होता है।
29.किसी खोखले गोले के इकाई क्षेत्रफल वाले वक्र तल से उसके केन्‍द्र पर बना आयतनात्‍मक कोण ठोस कोण या घन कोण कहलाता है।
30.ठोस कोण या घन कोण=क्षेत्रफल/त्रिज्‍या
31.घन कोण का अधिकतम मान 4πस्‍टेरेडियन होता है।
32.किसी वस्‍तु की सतह की प्रति इकाई प्रक्षेपित क्षेत्रफल की ज्‍योतीय तीव्रता को उसकी चमक कहते है।
33.चमक की इकाई कैण्‍डला/मी. तथा चमक=1/A
34.प्रतिलोम वर्ग नियम-किसी प्रकाश स्‍त्रोत द्वारा किसी प्रकाशित तल पर पहुचने वाली, प्रदीप्ति उस तल से प्रकाश स्‍त्रोत की दूरी के वर्ग के व्‍युत्‍क्रमानुपती तथा प्रदीप्ति तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होती है।                                                      E α 1/d2
35.लैम्‍बर्ट्स कोज्‍या नियम-किसी प्रकाश स्‍त्रोत के द्वारा किसी प्रकाशित तल पर पहुंचने वाली प्रदीप्ति,स्‍त्रोत से आने वाली प्रकाश किरण तथा अभिलम्‍ब के बीच बने कोण की कोज्‍या अनुक्रमानुपाती     होता है।                           E = 1cosθ/d2
36.प्रत्‍यक्ष प्रकाश व्‍यवस्‍था मे 90 प्रतिशत प्रकाश नीचे की ओर आता है।
37.अर्द्ध प्रत्‍यक्ष प्रकाश व्‍यवस्‍था मे 60 से 90 प्रतिशत प्रकाश नीचे की ओर आता है।
38.अप्रत्‍यक्ष प्रकाश व्‍यवस्‍था मे 90 प्रतिशत प्रकाश ऊपर की ओर पडता है। इस व्‍यवस्‍था मे छाया    पैदा नही होती है।
39.अर्द्धप्रत्‍यक्ष प्रकाश व्‍यवस्‍था मे कक्षो की आन्‍तरिक सुन्‍दरता बढाने के लिए प्रयोग की जाती है।
40.जिस लैम्‍प मे विद्युत धारा प्रवाहित करने पर ऊष्‍मा या प्रकाश अथवा दोनो ही उत्‍पन्‍न होते है उसे उद्दीप्‍त लैम्‍प कहते है।
41.उद्दीप्‍त लैम्‍प विद्युत धारा के ऊष्‍मीय प्रभाव पर कार्य करते है।
42.उद्दीप्‍त लैम्‍प दो प्रकार-कार्बन फिलामेंट लैम्‍प, धात्विक फिलामेंट लैम्‍प।
43.कार्बन फिलामेंट लैम्‍प मे कार्बन का फिलामेंट होता है।
44.कार्बन फिलामेंट का कार्यकारी तापमान 20000C होता है
45.कार्बन फिलामेंट लैम्‍प कम प्रकाश व प्रकाश लाल पीलापन होता है।
46.कार्बन फिलामेट लैम्‍प के अन्‍दर कार्बन का वाष्‍पीकरण रोकने के लिए बल्‍ब को निर्वात रखा जाता है।
47.कार्बन फिलामेंट लैम्‍प का प्रकाश 3.5 से 3.6 ल्‍यूमेन प्रति वाट एवं आयु लगभग 600 से 800 कार्य घंटे होती है।
48.कार्बन फिलामेंट लैम्‍प का प्रयोग बैट्री चार्जिंग तथा ऊष्‍मा विकिरण उपकरणों किया जाता है।
49.धात्विक फिलामेंट लैम्‍प मे टंग्‍स्‍टन धातु का फिलामेंट लगा होता है।
50.निर्वात धात्विक फिलामेट मे टगस्‍टन का गलनांक 34000C तथा कार्यकारी तापमान 2000 तक होता है।
51.टंगस्‍टन का विशि‍ष्‍ट प्रतिरोध 60 माइक्रो ओम्‍ह सेमी होता है।
52.निर्वात धात्विक फिलामेट मे टगस्‍टन का आक्‍सीकरण रोकने के लिए बल्‍ब को निर्वात रखा जाता है।
53.निर्वात धात्विक फिलामेट का प्रकाश 8 से 10 ल्‍यूमेन प्रति वाट तथा कार्यकारी आयु 750 से 850 कार्य घंटे होती है।
54.निर्वात धात्विक फिलामेट को पिग्‍मी लैम्‍प, कैण्डिल लाइट या नाइट लैम्‍प कहा जाता है।
55.गैस फिल्‍ड धात्विक फिलामेट लैम्‍प मे टंगस्‍टन का फिलामेंट लगा होता है।
56.गैस फिल्‍ड धात्विक फिलामेट लैम्‍प मे निष्‍क्रिय गैस आर्गन, नाइट्रोजन आदि गैस भरी जाती है।
57.गैस फिल्‍ड धात्विक फिलामेट लैम्‍प मे फिलामेंट का आकार बढा होने के कारण उसे क्‍वाइल के रूप मे लपेट कर लगा दिया जाता है और इसे क्‍वाइल्‍ड क्‍वाइल फिलामेंट लैम्‍प भी कहते है।
58.गैस फिल्‍ड धात्विक फिलामेट लैम्‍प का तापमान 2500-27000C तक होता है।
59.गैस फिल्‍ड धात्विक फिलामेट लैम्‍प मे प्रकाश 10 से 20 ल्‍यूमेन प्रति वाट और कार्यकारी आयु 1000 से 1200 कार्य घण्‍टे होती है।
60.गैस फिल्‍ड धात्विक फिलामेट लैम्‍प को Genral lighting service(GLS) बल्‍ब भी कहा जाता है।
61.लो प्रेशर मरक्‍यूरी वेपर लैम्‍प को फ्लारेसेन्‍ट लैम्‍प भी कहा जाता है।
62.फ्लारेसेन्‍ट लैम्‍प गैस विसर्जन प्रभाव के सिद्धांत पर कार्य करता है।
63.फ्लारेसेन्‍ट लैम्‍प 20 से 40 वाट तक की आती है।
64.फ्लारेसेन्‍ट लैम्‍प के अन्‍दर सूक्ष्‍म पारा बूदं के रूप मे व ऑर्गन गैस भरी जाती है।
65.फ्लारेसेन्‍ट लैम्‍प दीवारो पर फॉस्‍फर पाउडर की लेप किया होता है।
66.ऑर्गन एक निष्‍क्रिय गैस है।
67.फ्लारेसेन्‍ट लैम्‍प की दक्षता 38 ल्‍यूमेन प्रति वाट और औसत जीवन आयु 5000 घंटा होती है।
68.फ्लारेसेन्‍ट लैम्‍प लैम्‍प 60 सेमी. और 120 सेमी. तक ही उपलब्‍ध होती है।
69.स्‍टार्टर एक ऐसी युक्ति है जो किसी परिपथ को 20-25 बार प्रति मिनट की दर पर ऑन तथा आफ कर सकता है।
70.स्‍टार्टर मे दो बाईमटेलिक स्ट्रिप लगी होती है, और इसे हाइड्र्रोजन या हीलियम गैस भरी जाती है।
71.आजकल ग्‍लो टाइप स्‍टार्टर का प्रयोग अधिक किया जाता है।
72.चॉक यह सेल्‍फ इन्‍डक्‍शन पर कार्य करती है।
73.ट्यूब मे चाकॅ ब्‍लास्‍टिंग का कार्य करती है। प्रारम्‍भ मे वोल्‍टेज को बढा देती है।
74.फ्लारेसेन्‍ट ट्यूब चॉक का शक्ति गुणक 0.5-0.8 होता है।
75.फ्लारेसेन्‍ट लैम्‍प मे कम रेग्‍यूलेशन चॉक प्रयोग मे ली जाती है।
76.सोडियम वेपर लैम्‍प गैस डिस्‍चार्ज के सिद्धांत पर कार्य करता है।
77.सोडियम वेपर लैम्‍प मे सोडियम और निऑन गैस भरी होती है।
78.सोडियम वेपर लैम्‍प की आंतरिक ट्युब को आर्क ट्यूब भी कहा जात है।
79.सोडियम वेपर लैम्‍प की दक्षता धारा घनत्‍व के निश्चित मान की तीव्रता से कम होती है।
80.सोडियम वेपर लैम्‍प की नली आकार की बनी हाती है।
81.सोडियम वेपर लैम्‍प मे दो बेरियम और स्‍ट्रॉन्शियम के लेप किए हुए टंगस्‍टन इलेक्‍ट्रॉड लगे होते है।
82.सोडियम वेपर लैम्‍प मे हाई लीके ट्रांफार्मर का प्रयोग किया जाता है। इसे लैम्‍प का जीवन काल 6000 कार्य घंटे माना जाता है।
83.सोडियम वेपर लैम्‍प की दक्षता 110 ल्‍यूमेन/वाट होती है।
84.हाई प्रेशर सोडियम वेपर लैम्‍प उच्‍च दाब व अति उच्‍च धारा पर कार्यकारी होता है।
85.मरक्‍युरी ऑर्गन टाइप लैम्‍प को सदैव ऊर्ध्‍वाघर लटकाना चाहिए।
86.मरक्‍युरी ऑर्गन टाइप लैम्‍प की दक्षता 400 वाट के लिए 45 ल्‍यूमेन/वाट होती है।
87.मरक्‍युरी ऑर्गन टंगस्‍टन टाइप लैम्‍प ए.सी. और डी.सी. दोनो पर कार्य करता है।
88.निऑन साइन लैम्‍प का प्रयोग प्रचार, विज्ञापन के क्षेत्र आदि मे होता है।
89.निऑन साइन लैम्‍प की नली की लम्‍बाई एक मीटर से पांच मीटर तक तथा 10mmव्‍यास से 20mmतक होती है 
90.निऑन साइन लैम्‍प पायरेक्‍स व कैप्‍ड इलेक्‍ट्रॅाड दो प्रकार के होते है। और नली मे हीलियम व निऑन गैस भरी जाती है।
91.निऑन साइन लैम्‍प की दक्षता 15 ल्‍यूमेन प्रति वाट से 40 ल्‍यूमेन प्रति वाट के बीच होती है और 5 वाट तक की होती है।
92.कार्बन आर्क लैम्‍प डी.सी. पर कार्य करता है।
93.कार्बन आर्क लैम्‍प मे धनात्‍मक से ऋणात्‍मक इलेक्‍ट्राड आधे व्‍यास का होता है।
94.कार्बन आर्क लैम्‍प मे दोनो इलेक्‍ट्रोउो के मध्‍य 1.5-6 तक का एयर गैप रखा जाता है।
95.कार्बन आर्क लैम्‍प मे धन इलेक्‍ट्रोड से 85%, ऋण इलेक्‍ट्रोउ से 10% तथा 5% भाग आर्क उत्‍सर्जित होती है।
96.कार्बन आर्क लैम्‍प मे धन इलेक्‍ट्रोड का तापमान 3500-4000 0C तक तथा ऋण इलेक्‍ट्रोड का तापमान 2000 0C तक होता है।
97.कार्बन आर्क लैम्‍प आखों के लिए नुकसानदायक होता है।
98.कार्बन आर्क लैम्‍प की दक्षता 20 ल्‍यूमेन प्रतिवाट तक प्रकाश उत्‍पन्‍न करता है।
99.हैलोजन लैम्‍प मे हैलोजन गैस भरी जाती है।
100.मर्करी लैम्‍प का सहायक इलेक्‍ट्राड 50K ohm तक होता है।
101.इनवर्स स्‍क्‍वायर नियम लैम्‍बर्ट कोसाइन नियम है जो इल्‍युमिनेशन के लिए।
102.निऑन लैम्‍प टैस्‍टर मे 2000 ohm का प्रतिरोध सीरिज मे जोडा जाता है।
103.को काम्‍पैक्‍ट फ्लोरोसेंट लैंप या इलेक्‍ट्रनिक ब्लास्‍ट फ्लोरोसेट लैम्‍प या एनर्जी सेविंग लैम्‍प कहा जाता है।
104.थ्रेड टाइप होल्‍डर 500 वाट लैम्‍प के काम मे आता है।
105.बायोनेट कैप टाइप होल्‍डर मर्करी लैम्‍प मे प्रयोग किया जाता है।
106.सजावटी लाइटो के लिए ड्रम स्विच का प्रयोग किया जाता है।
107.लाइट डेकोरेशन मे निऑन फ्लैशर का प्रयोग किया जाता है।
108.पढने के लिए प्राय: 20 से 30 ल्‍यूमेन/मी2 तक होती है।
109.अच्‍छी लाइटिंग न तो पूर्णत: डायरेक्‍ट होती और न ही पूर्णत: इनडायरेक्‍ट हाती है बल्कि इन दोनो का सही संतुलन होता है।
110.हैलोजन लैम्‍प मे टंगस्‍टन फिलामेन्‍ट का प्रयोग किया जाता है।
111.रिडक्‍शन फैक्‍टर मीन स्‍फैरिकल कैण्‍डल पावर का अनुपात है।
112.रैपिड स्‍टार्ट लैम्‍प प्रतिदीप्‍त दीपों मे नवीनतम प्रकार का दीप है।
113.उच्‍च दाब मरकरी वेपर लैम्‍प मे आयनीकरण प्रक्रिया मुख्‍य तथा सहायक इलेक्‍ट्रॅाड द्वारा प्रारम्‍भ की जाती है।
114.निऑन साइन नली के प्रचालन के लिए वोल्‍टेज नली की लम्‍बाई पर निर्भर करता है।
115.निऑन साइन नली के प्रकाश का रंग नली मे भरी हुई गैस पर निर्भर करता है।
116.प्रतिदीप्‍त दीप की चॉक कुण्‍डली शार्ट सर्किट हो जाए तो दीप को पुन: चालू करने पर उसका तंतु फुंक जाऐगे।
117.फ्लोरोसेंट ट्यूब का व्‍यास 20 से 40mm तक होता है।
118.निऑन साइन ट्यूब मे स्‍टेप अप ट्रासंफार्मर का प्रयोग किया जाता है।
119.प्रकाश मापी फोटो डायोड प्रकृति पर आधारित होता है।
120.मरकरी वेपर लैम्‍प 5-10 वायुमण्‍डलीय दाब पर कार्य करता है।
121.कार्बन आर्क लैम्‍प मे धन इलेक्‍ट्राड पर सर्वाधिक प्रकाश उत्‍पन्‍न होता है।
122.एक मानक मोमबत्‍ती से एक फुट की दूरी पर एक वर्ग फुट क्षेत्र पर आपतित होने वाली प्रकाश की मात्रा एक कैन्डिल पावर कहलाती है।
123.एक कैन्डिल पावर 0.0201 वाट होता है।
124.प्रदीप्ति कारक तीन प्रकार-स्‍थान ऊचाई अनुपात, उपयोगिता गुणांक, अवपात गुणांक आदि।
125.स्‍थान: ऊचाई का मान 1:2 होना चाहिए।
126.उपयोगिता गुणांक=उपयोगी प्रकाश/पकाशोत्‍पादक वस्‍तु मे उत्‍पन्‍न प्रकाश
127.अवशोषण गुणांक=अवशोषित प्रकाश/आ‍पतित प्रकाश
128.परावर्तन गुणांक=परावर्तित प्रकाश/आपतित प्रकाश
129.पारेषण गुणांक=पारेषित प्रकाश/आपतित प्रकाश
130.अवपात गुणांक का मान 1.2 से 1.4 के बीच होना चाहिए।
131.कार्य स्‍थल पर प्रकाश फ्लक्‍स
132.प्रदीप्ति पुंज को मापने के एक अन्‍य इकाई कैण्डिल पावर कहलाती है।
133.एक मानक बल्‍ब का कैण्डिल पावर 0.0201 वाट होता है।
134.1 मिली फोट=1 ल्‍यूमेन/मी2
135.1 फुट कैण्डिल=1C.P/फुट2

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