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HEAT

                    CHAPTER-7
                    ऊष्‍मा(HEAT)
1.वह ऊर्जा जिसके कारण गर्मी या सर्दी का आभास होता है। ऊष्‍मा कहलाती है।
2.ऊष्‍मा स्थिर आयतन पर गैस के समस्‍त अणुओं की कुल गतिज ऊर्जा की माप है।
3.एक ग्राम पानी का तापक्रम 10C बढाने के लिए जितनी ऊष्‍मा की आवश्‍यकता होती है उसे एक कैलोरी कहते है।
4.एक पौण्‍ड पानी का तापक्रम 10C बढाने के लिए जितनी ऊष्‍मा की आवश्‍यकता होती है। उसे एक सेन्‍टीग्रड हीट यूनिट कहते है।
5.एक पौण्‍ड पानी का तापक्रम 10C बढाने के लिए जितनी ऊष्‍मा की आवश्‍कता होती ै उसे एक ब्रिटिश थर्मलन यूनिट कहते है।
6.ऊष्‍मा का मात्रक प्रणाली मे कैलोरी तथा प्रणाली मे जूल है।
7.वह ऊर्जा जो तापान्‍तर के कारण स्‍थानान्‍तरित होती है ऊष्‍मा कहलाती है।
8.किसी वस्‍तु के गर्म या ठंडा होने के माप को तापमान कहते है।
9.तापमान की इकाई डिग्री है।
10.ताप का वह मान जिसको गैस के शून्‍य आयतन पर शून्‍य मानकर बनाया जाता है, ताप का केल्विन तापमान कहलाता है।
11.जिस तापमान पर कोई द्रव उबलने लगता है उसे उस द्रव का क्‍वथनांक कहते है।
12.पानी का क्‍वथनांक 1000C होता है।
13.जिस तापमान पर कोई द्रव, ठोस मे जमने लगता है तो उस तापमान को उस पदार्थ का गलनांक कहते है।
14.बर्फ का गलनांक 00C होता है।
15.तापमान को थर्मामीटर से मापा जाता है।
16.ऊष्‍मा को कैलारी मीटर से मापा जाता है।
17.ऊष्‍मा की मात्रा अलग होने पर भी दो वस्‍तुओं का तापमान एक हो सकता है।
18.किसी वस्‍तु का तापमान बढने या नहीं बढने पर भी उसकी ऊष्‍मा की मात्रा अवश्‍य बढती है।
19.किसी वस्‍तु के एकाकं द्रव्‍यमान के ताप को 10C बढाने के लिए आवश्‍यक ऊष्‍मा की मात्रा को उस वस्‍तु के पदार्थ की विशिष्‍ट ऊष्‍मा कहते है।
20.विशिष्‍ट ऊष्‍मा का मात्रक प्रणाली मे जूल किग्रा-1 केल्विन-1 तथा प्रणाली मे कैलोरी ग्राम-1 0C-1 
21.
22.किसी वस्‍तु को दी गई ऊष्‍मा या उससे ली गई ऊष्‍मा पर्दा‍थ के द्रव्‍यमान, पदार्थ की विशिष्‍ट ऊष्‍मा व तापमान के अन्‍तर पर निर्भर करती है।
23.पदार्थ मे ऊष्‍मा की मात्रा=m*s*t  
24.किसी वस्‍तु के ताप को 10C बढाने के लिए आवश्‍यक ऊष्‍मा को उस वस्‍तु की ऊष्‍मा धारिता कहते है।
25.पदार्थ की ऊष्‍मा धारिता कैलोरी=m.s./0C
26.किसी वस्‍तु का जल तुल्‍यांक जल की वह मात्रा है जिसके ताप को 1 बढाने के लिए उतनी ही ऊष्‍मा की आवश्‍यकता होती है जितनी कि वस्‍तु के ताप को 1 बढाने के लिए आवश्‍यक है।
27.पदार्थ का जल तुल्‍यांक=m.s.ग्राम
28.ऊष्‍मा का यांत्रिक जल तुल्‍यांक 4186 जूल होता है।
29.कैलोरीमीटर किसी पदार्थ की विशिष्‍ट ऊष्‍मा व जल तुल्‍यांक ज्ञात करने के काम आता है।
30.नियत ताप किसी पदार्थ के एकांक द्रव्‍यमान की अवस्‍था मे परिवर्तन करने के लिए आवश्‍यक ऊष्‍मा की मात्रा को उस पदार्थ की गुप्‍त ऊष्‍मा कहते है।
31.किसी द्रव के एकांक द्रव्‍यमान को उसके क्‍वथनांक पर उसी की वाष्‍प मे परिवर्तित करने के लिए  आवश्‍यक ऊष्‍मा की मात्रा को उस द्रव के वाष्‍पन की गुप्‍त ऊष्‍मा कहते है।
32.किसी ठोस पदार्थ के एकांक द्रव्‍यमान को उसके गलनांक पर उसी ताप के द्रव मे परिवर्तित करने के लिए आवश्‍यक ऊष्‍मा की मात्रा को उस पदार्थ के गलन की गुप्‍त ऊष्‍मा कहते है।
33.भाप की गुप्‍त ऊष्‍मा 536 कैलोरी ग्राम-1 होती है।
34.बर्फ की गुप्‍त ऊष्‍मा 80 कैलोरी ग्राम-1 होती है।
35.थर्मामीटर तरल और ठोस पदार्थ के गर्म होने पर बढने के सिद्धांत पर कार्य करता है।
36.जिसकी सहायता से वस्‍तु का ताप मापा जाता है वह उपकारण तापमापी कहलाता है।
37.साधारण तापमान को मापने के लिए थर्मामीटर का प्रयोग किया जाता है।
38.थर्मामीटर मे पारे तथा एल्‍कोहल का प्रयोग किया जाता है। मुख्‍यत: पारे का प्रयोग करते है।
39.पारा कॉच की नली मे चिपकता नहीं है।
40.पारा ऊष्‍मा का अच्‍छा चालक होता है।
41.पारा शुद्ध अवस्‍था मे पाया जाता है।
42.पारे का जमाव बिंदु -390C होता है। इससे नीचे का तापमान नही माप सकते है।
43.पारे का क्‍वथनांक बिन्‍दु 3570C होता है इससे ऊपर का तापमान नही माप सकते है।
44.अधिक तापमान को मापने के लिए पायरोमीटर का प्रयोग करते है।
45.पायरोमीटर थर्मोकपल के सिद्धांत पर कार्य करता है।
46.पायरोमीटर दो प्रकार-थर्मोइलेक्ट्रिक पायरोमीटरख्‍ ऑष्टिकल पायरोमीटर होता है।
47.प्रत्‍येक पदार्थ को चाहे वह ठोस, द्रव या गैस हो गर्म करने पर उसमे प्रसार होता है। इस प्रसार को ऊष्‍मीय प्रसार कहते है।
48.इस पदार्थ को गर्म करने पर उसकी लम्‍बाई मे वृद्धि होती है तो इस प्रसार को रेखीय प्रसार कहते है।
49.किसी पदार्थ की एकांक लम्‍बाई की छड के ताप को 10C बढाने पर उसकी लम्‍बाई मे जो वृद्धि होती है उसे उस पदार्थ का रेखीय प्रसार गुणांक कहते इसे  प्रदर्शित करते है इसे दैर्ध्‍य प्रसार गुणांक भी कहते है।
50.रेखीय प्रसार गुणांक=लम्‍बाई मे वृद्धि/प्रारम्भिक लम्‍बाई  ताप वृद्धि
51.थर्मोस्‍टेट का कार्य तापमान को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
52.द्रवो मे ऊष्‍मा का स्‍थानान्‍तरण संवहन द्वारा होता है।
53.संलयन मे निहित ऊष्‍मा गलन की गुप्‍त ऊष्‍मा कहलाती है।
54.ऊष्‍मा सदैव उच्‍च तापमान से निम्‍न तापमान की ओर बढती है।
55.विकिरण विधि द्वारा ऊष्‍मा संचरण मे किसी भी माध्यम की आवश्‍यकता नही होती है।
56.C/100=F-32/180=r/80=k-273/100
57.1 B.TTh.U=252 कैलोरी
58.1 CC.H.U.=1.8B.Th.U.B
59.1 C.H.U.=453.6 कलौरी
60.पानी मे ऊष्‍मा का संचरण संवहन द्वारा होता है।
61.ऊष्मा का आदान प्रदान, दी गई ऊष्‍मा=ली गई ऊष्‍मा  या m1s1t1= m2s2t2

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