CHAPTER-4
घर्षण(FRICTION)
1.जब एक पिण्ड दूसरे पिण्ड पर फिसलता है या फिसलने का प्रयास करता है तो उनके सम्पर्क तलो के मध्य एक बल कार्य करता है जो पिण्डो की सापेक्ष गति का विरोध करता है इस गति विरोधी बल को ही घर्षण बल या घर्षण कहते है।
2.जब एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड पर चालाने का प्रयास किया जाता है फिर भी पहला पिण्ड विरामावस्था मे ही रहता है तो दानो पिण्डों के सम्पर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को स्थैतिक घर्षण कहते है।
3.सीमान्त सन्तुलन की स्थिति मे कार्य करने वाले घर्षण को सीमान्त घर्षण कहते है
4.सीमान्त घर्षण का मान अधिकतम होता है।
5.जब एक पिण्ड दूसरे पिण्ड के ऊपर चलने का प्रयास करता है तो दोनो पिण्डों के सम्पर्क तलो के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को गतिक घर्षण कहते है।
6.गतिक घर्षण का मान सदैव सीमान्त घर्षण के मान से कम होता है।
7.सीमान्त घर्षण सम्पर्क तलो की प्रकृति पर निर्भर करता है।
8.सीमान्त घर्षण और अभिलम्ब प्रतिक्रिया के अनुपात को स्थैतिक घर्षण गुणांक या घर्षण गुणांक कहते है।
9.गतिक घर्षण सम्पर्क तलों के क्षेत्रफल या आकृति पर निर्भर नही करता है।
11.घर्षण गुणांक का मान सदैव एक (1) से कम रहता है।
12.घर्षण गुणांक की इकाई नहीं होती है।
13.सीमान्त घर्षण और अभिलम्ब प्रतिक्रिया का परिणामी, अभिलम्ब प्रतिक्रिया से जो कोण बनता है, उसे घष्रण कोण कहते है।
14.स्थैतिक घर्षण गुणांक घर्षण कोण के स्पर्शज्या के बराबर होता है।
15.घर्षण बल सदैव गति के विपरीत दिशा मे कार्य करता है।
15.घर्षण बल सदैव गति के विपरीत दिशा मे कार्य करता है।
16.घर्षण के कारण मशीन की दक्षता कम हो जाती है।
17.घर्षण बल=घर्षण गुणांक*अभिलम्ब प्रतिक्रिया
17.घर्षण बल=घर्षण गुणांक*अभिलम्ब प्रतिक्रिया
18.सीमान्त घर्षण बल दो सतहो के बीच की अभिलम्ब प्रतिक्रिया के समानुपाती होता है।
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