CHAPTER-12
(BASIC
ELECTRONIC)
1.जमेंनियम तथा सिनिकॉन
बैण्ड गेप(इलेक्ट्रॉन वोल्ट में) 0.7, 1.1 है।
2.संधि डायोड की उत्क्रम
अभिनति का प्रतिरोध 106 Ω ओम्ह होता है।
3.ताप में पर्याप्त वृद्धि
करने पर अर्द्धचालक की चालकता बढती है।
4.अवक्षय पर्त में विभव
प्राचीर का कारण वर्जित स्तर(बैंड)।
5.संयोजकता बैण्ड और चालन
बैण्ड के बीच ऊर्जा अन्तराल को वर्जित ऊर्जा अंतराल कहतें है।
6.फर्मी स्तर की संगत ऊर्जा
को फर्मी ऊर्जा स्तर कहते है।
7.अर्द्धचालक वे पदार्थ
जिनकी विद्युत चालकता चालक और विद्युत्राधी के मध्य होती है।
8.अषुद्धियां युक्त
अर्द्धचालक को बाह्य अर्द्धचालक कहतें है।
9.कमरे के तापमान पर
अर्द्धचालक पदार्थ के इकाई आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1018 होती है।
10.जर्मेनियम की प्रतिरोधकता 0.65 ओम्ह-मीटर होती है।
11.अणुओं में मुक्त इेक्ट्रॉन
केवल स्थायी कक्षाओं के नाभिक के चारो ओर घूमतें है।
12.किसी अणु की सबसे बाह्य
कक्षा को संयोजी कक्षा कहतें है।
13.सिलिकॉन अणु में 4 बैलेंस इलेक्ट्रॉन्स होतें है।
14.अचालक पदार्थ में मुक्त
इलेक्ट्रॉन्स, नगण्य अथवा शून्य होतें है।
15.शुद्ध अर्द्धचालक में
अषुद्धि मिलाने की प्रक्रिया को डोपिंग कहा जाता है।
16.जब डोनर अषुद्धियों को
अर्द्धचालक में मिलाया जाता है। तो चालन बैण्ड की नीचे कुछ दूरी पर ऊर्जा स्तरों
का निर्माण होता है।
17. P-N संधि के निर्माण हेतु
शुद्ध जर्मेनियम, सिलिकॉन का एक क्रिस्टल
लिया जाता है।
18.डयोड में एक दिषीय धारा
प्रवाहित होती है।
19.बैट्री में अरोपित विभव का
मान बढाया जाता है।, रोधी विभव का मान घटता
जाता है।
20.प्रकार के अर्द्धचालक में
धारा मुक्त इलेक्ट्रॉनों के कारण प्रवाहित होती है।
21.अग्र बायस में डायोड बंद
स्विच की भांति कार्य करता है।
22.पष्च बायस में डायोउ खुले
स्विच की भांति कार्य करता है।
23.प्रकाष उत्सर्जक डायोड एक
प्रकार का डायोड है जो कि अग्र बायस की अवस्था में लाइट उत्पन्न करता है।।
24.डायोड का अग्र बायस
प्रतिरोध निम्न होता है।
25.जर्मेनियम का ब्रेक डाउन
वोल्टेज 0.75eV होता है।
26.अर्द्धचालक में आवेष वाहक
इलेक्ट्रॉन तथा कोटर होतें है।
27.शुद्ध जर्मेनियम 00k पर कुचालक होता है।
28.अर्द्धचालकों में परमाणु
परस्पर सहसंयोजी बंध द्वारा बद्ध होतें है।
29.अर्द्धचालकों में एक
सह-संयोजी बंध टूटने पर एक इलैक्ट्रॉन व एक कोटर उत्पन्न होता है।
30. P-N डायोड में पष्च बायस केवल
जीनर ब्रेकडाउन, केवल एवलान्चे ब्रेकडाउन
की स्थिति में अचानक धारा बढने का कारण है।
31. P-N संधि पर रोधक विभव का मान
लगभग 0.2 वोल्ट होता है।
32.अर्द्धचालकों में हीट-सिंक
प्रयुक्त करने का उद्धेष्य अत्यधिक ताप वृद्धि रोकना होता है।
33.अर्द्धचालकों में पष्च
बायस का प्रभाव विभव रोधक को बढाना है।
34.अर्द्धचालक डायोड में
डिपलीषन क्षेत्र की चौडाई 1 माइक्रानॅ होती है।
35.जीनर डायोड का प्रयोग
परिवर्ती धारा, स्थिर वोल्टेज उद्धेष्य
हेतु किया जाता है।
36. P-N संधि का डायोड का उपयोेग
दिष्टकारी के लिए किया जाता है।
37.एक P-N संधि की मोटाई 10-6 निम्न कोटि की होती है।
38. P-N संधि डायोड के अग्र तथा
पष्च बायस में प्रतिरोधें का अनुपात लगभग 1 :104 होता है।
39. P-N संधि डायोड के अग्र एवं
पष्च बायस में आवेषों की गति अग्र बायस में विसरण एवं पष्च बायस में अनुगमन का
प्रभावी तरीका है।
40.अर्द्धचालकों का प्रतिरोध
ताप गुणांक सदैव ऋणात्मक होता है।
41.यदि चालन बैण्ड तथा
संयोजकता बैण्ड के बीच की दूरी 1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट हो, तों यह संयोजन अर्द्धचालक कहलाता है।
42. P-N संधि में रोधक विभव का
अधिकतम मान पष्च बायस की स्थिति में होता है।
43. P-N संधि है। अओम्हीय प्रतिराध
है।
44.एक अर्द्धचालक की
प्रतिरोधकता निर्भर करती है।, अर्द्धचालक के परमाणु के
प्रकार पर ।
45.अग्र बायसित स्थिति में
अवक्षय परत की चौडाई घटती है।
46.Ga Asयौगिक अर्द्धचालक है।
47.अर्द्धचालक में अर्द्ध भरे
संयोजी बैण्ड होतें है।
48.डायोड की PVI रेटिंग का मान द्वितीयक वोल्टेज का अधिकतम मान होता है।
49.सोलर सैल फोटो वोल्टाइक
डिवाइस है।
50.प्रकाष-उत्सर्जक डायोड
अग्र अवस्था में प्रकाष उत्पन्न करता है।
51.प्रकाष-उत्सर्जक डायोड को
गेलियम, फॉस्फोरस, आर्सेनिक, तत्व से बनाया जाता है।
52.गेलियम आर्सेनाइड का उपयोग
करके LED के प्रकाष का रंग लाल प्राप्त होता है।
53. गेलियम फोस्फाइड का उपयोग LED करके के प्रकाष का रंग हरा प्राप्त होता है।
54. LED में फिलामेन्ट नहीं होने
कारण धारा की आवष्यकता कम होती है।
55. LED की पावर रेटिंग मिलीवाट
होती है।
56.जीनर डायोड, को जिसे भंजन डायोड कहतें है।
57.भंजन विभव का मान डोपिंग
घनत्व पर निर्भर करता है।
58.Ge के लिए 0.3V तथा Si के लिए 0.7 Vहोता है।
59.PCB का निर्माण करतें समय, ताम्र लेपित प्लेट का परिपथ का खाका तैयार करने की विधि ऐंचिग होती
है।
60.एक सन्धि डायोड की अवक्षय
परत की चौडाई उत्क्रम बायस पर बढती है।
61.एक इन्ट्रेंजिक अर्द्ध
चालक में सामान्य कम तापमान पर इन्सुलेटर की भॉंति धारा लीक करती है।
62.व्युत्क्रम षिखर वोल्टता, वह उच्चतम व्युत्क्र्रम वोल्टता जिसको डायोड सहन कर सकता है।
63.दिष्टकारी परिपथ डायोड के
परिचालन पर निर्भर करता है।
64.एक सेतु दिष्टकारी में
प्रत्येक डायोड में प्रवाहित धारा का मान भार धारा के तुल्य होता है।
65.एक पूर्ण तरंग दो डायोउ
वाले दिष्टकारी की PVI क्षमता द्वितीयक वोल्टता Vs के षिखर मान से दो गुनी
होनी चाहिए।
66.फुल वेव रेक्टीफायर सबसे
अधिक उपयोग हाने वाले रेक्टीफायर होता है।
67.जीनर डायोड में धारा के
मान को बाह्य परिपथ के प्रतिरोध द्वारा नियन्त्रित करते है।
68.बोहर की परमाणु थ्योरी के
अनुसार एक इलैक्ट्रॉन निष्चित त्रिज्या की कक्षा में प्रचालित होता है।
69.अर्द्धचालक का ताप
प्रतिरोध गुणंाक शून्य होता है।
70.जब एक शुद्ध अर्द्ध चालक
को गर्म किया जाता है। तो इसके प्रतिरोध में कमी आ जाती है।
71.एक फारवर्ड बायस PN जंक्षन का प्रतिरोध के Ω क्रम में होता है।
72.रिवर्स बायस जंक्षन में
प्रवाहित धारा का मान लगभग शून्य होता है।
73.एक क्रिस्टल डायोड में एक
जंक्षन होता है।
74.एक क्रिस्टल डायोड अरेखीय
युक्ति है।
75.यदि एक क्रिस्टल डायोड में
डोपिंग का स्तर बढा दिया जाये तो इसकी अवक्षय परत बढ जायेगी।
76.जीनर डायोड को परिपथ में
हमेंषा रिवर्स बायस में जोड जाता है।
77.ब्रेक डाउन रिजन में जीनर
डायोड स्थिर वोल्टेज स्त्रोत की तरह व्यवहार करता है।
78.एक अर्द्धतरंग दिष्टकारी
में आउटपुट को फिल्टर करना कठिन होता है।
79.सर्वोत्तम वोल्टेज
रेगूलेषन के लिए चोक इनपुट फिल्टर परिपथ का उपयोग करना चाहिए।
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