CHAPTER-2
(AMPLIFIERS AND OSCILLATORS)
1.प्रवर्धक वह युक्ति है। जो
दुर्बल इनपुट सिग्नल को प्रवर्धित करती है, प्रवर्धक कहलाता है।
2.प्रवर्धक के आउटपुट व
इनपुट के अनुपात को प्रवर्धन कहतें है।
3.प्रवर्धन किसी भी विद्युत
सिग्नल के आयाम को बढाने की प्रक्रिया है।
4.वोल्टेज प्रवर्धक में उच्च
प्रवर्धन गुणक वाली युक्ति प्रयोग में ली जाती है।
5.धारा प्रवर्धक में उच्च
अन्योन्य चालकता वाली युक्ति प्रयोग की जाती है। इनका प्रयोग फोटोइलेक्ट्रिक
परिपथों में किया जाता है।
6.ट्रांसफार्मर कपलिंग का
उपयोग इम्पीडैन्स मैचिंग के लिए किया जाता है।
7.दोलित्र एक ऐसी
इलैक्ट्रॉनिक युक्ति है, जो बिना किसी बाहरी ए.सी.
इनपुट सिग्नल के ए.सी. पावर आउटपुट(आवृत्ति युक्त समान आकृति की तरंगे) देती है।
8.दोलित्र का मख्य सिद्धान्त
यह है। कि इलेक्ट्रॉन, सप्लाई स्त्रोत से गतिज
ऊर्जा प्राप्त करता है।
9.दोलित्र में मिलने वाले
दोलन को डैम्प्ड दोलन कहतें है।
10.दोलित्र के लिए शर्ते-1.परिपथ का लूप गेन सउैव इकाई के बराबर या कुछ ज्यादा होना चाहिए।
2.परिपथ
में फेज षिफ्ट का मान शून्य होना चाहिए।
11.विद्युत चुम्बकीय तरंगों
को लम्बी दूरी तक प्रेषित होने के कारण उनकी शक्ति क्षीण हो जाती है।
12.कपलिंग कैपेसिटर के प्रयोग
से परिपथ की बायसिंग में, तकनीकी खराबी से बचा जा
सकता है।
.13.मल्टीवाइब्रेटर, दोलित्र का एक रूप है।
14.श्रृव्य आवृत्ति प्रवर्धक
द्वारा 20Hz से 20kHz आवृत्ति के सिग्नल
प्रवर्धित किए जातें है।
15.दोलित्र में ऊर्जा का
स्त्रोत डी.सी. पावर सप्लाई होती है।
16.वोल्टेज प्रवर्धक वोल्टेज
सिग्नल को प्रवर्धित करता है।
17.दोलित्र डी.सी. ऊर्जा को
ए.सी. ऊर्जा में रूपान्तरित करता है।
18.ट्यून्ड आधार दोलित्र को
टिकलर या आर्मस्ट्रांग दोलित्र के नाम से भी जाना जाता है।
19.इन्टरमीडिएट आवृत्ति
प्रवर्धक मंे आवृत्ति परास 450Hz से 470KHz होती है।
20.प्रवर्धक किसी भी विद्युत
सिग्नल के आयाम को बढाने की प्रक्रिया है।
21.फेज-षिफ्ट दोलित्र में R-C परिपथ प्रयुक्त किए जाते
है।
22.R-C कपल्ड प्रवर्धक में दो
प्रतिरोध तथा एक संधारित्र का उपयोग करतें है।
23.विन ब्रिज दोलित्र के
दोलनों की आवृत्ति 1:10 अनुपात की आवृत्ति परास में परिवर्तित होती है।
24.कपलिंग कैपेसिटर के द्वारा
एक प्रवर्धक को दूसरे प्रवर्धक के साथ संयोजित किया जाता हैं।
25.R-C दोलित्र में धनात्मक फीडबैक प्रयुक्त होता है।
26.कॉमन उत्सर्जक प्रवर्धक
सर्वाधिक प्रयुक्त होता है।, क्योकिं इसका पावर गेन
अधिक होता है।
27.प्रवर्धक का उपयोग वोल्टता, धारा या शक्ति में वृद्धि प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
28.प्रवर्धक में ट्रांसफॉर्मर
कपलिंग द्वारा अधिकतम गेन प्राप्त होता है।
29.वर्ग-A पावर प्रवधर्क में इनपुट के एक पूर्ण चक्र के सापेक्ष आउटपुट सिग्नल
भी एक पूर्ण चक्र 360 प्राप्त होता है।
30.वर्ग-Bपावर प्रवधर्क में इनपुट के एक पूर्ण चक्र से सापेक्ष आउटपुट सिग्नल
भी अर्द्ध चक्र 180 होता है।
31.वर्ग-ABपावर प्रवधर्क में इनपुट के एक पूर्ण चक्र से सापेक्ष आउटपुट सिग्नल
भी अर्द्ध चक्र से अधिक, परन्तु पूर्ण चक्र से कम
(108 व 360 के मध्य) होता है।
32. वर्ग-C पावर प्रवधर्क में इनपुट के एक पूर्ण चक्र से सापेक्ष आउटपुट सिग्नल
भी अर्द्ध चक्र से कम होता है।
33.वर्ग-B पावर प्रवर्धक में अधिकतम दक्षता 78.5 होती है।
34.टिकलर दोलित्र को ट्यून्ड
आधार दोलित्र के नाम से जाना जाता है।
35.वर्ग-C पावर प्रवर्धक की दक्षता लगभग 85 होती है।
36.दोलित्र एक फीडबैक
युक्त-प्रवर्धक है।
37.1MHz आवृत्ति उत्पन्न करने के
लिए कॉलपिट दोलित्र का उपयोग किया जाता है।
38.विन ब्रिज दोलित्र में
धनात्मक व ऋणात्मक फीडबैक उपयोग किया जाता है।
39.प्रवर्धक का वोल्टेज गेज डेसीबल
में व्यक्त किया जाता है।
40.उच्च आवृत्ति अनुक्रिया
प्रदान डायरेक्ट कपलिंग प्रदान करता है।
41.आदर्ष प्रवर्धक का शोर
गुणांक 0db होता है।
42.विश्रांती दोलित्र, जो ज्या तरंग उत्पन्न नहीं करता है।
43.कॉलपिट दोलित्र में चाकॅ
क्वॉइल उच्च आवृत्ति की धारा को रोकती है।
44.क्रिस्टल दोलित्र में पिजो
इलैक्ट्रिक क्रिस्टल उपयोग किया जाता है।
45. वर्ग-A पावर प्रवर्धक की दक्षता लगभग 50 होती है।
46..वर्ग-B पावर प्रवर्धक में इनपुट के एक पूर्ण चक्र के सापेक्ष आउटपुट सिग्नल
अर्द्धचक्र प्राप्त होता है।
47. वर्ग-C पावर प्रवर्धक सर्वाधिक बाधा उत्पन्न करता है।
48.हार्टले दोलित्र
सामान्यतया रेडियो रिसीवर में उपयोग किए जातें है।
49.फेज षिफ्ट दोलित्र में R-C परिपथ तीन होते है।
50.बिन ब्रिज दोलित्र में
दोलन की आवृत्ति
होती
है।
51.कॉलपिट दोलित्र में फीडबैक
स्पिलिट संधारित्रों के मध्य से प्राप्त होता है।
52.क्रिस्टल दोलित्र स्थिर
आवृत्ति दोलित्र है।
53.उच्च Q के गुणक के कारण क्रिस्टल दोलित्र, स्थिर आवृत्ति दोलित्र है।
54.निम्न आउटपुट क्रिस्टल
दोलित्र की महत्वपूर्ण सीमा है।
55.कम दक्षता वाले पावर
प्रवर्धक में अधिक बैट्री खपत होती है।
56.एम्प्लीफायर में प्रयुक्त
कपलिंग सुधारित्र डी.सी. को रोकती है।
57.बाईपास कैपेसिटर के ए.सी.
को बाईपास करता है।
58.ट्रांजिस्टर एम्प्लीफायर
में संधारित्र का उपयोग कसापलिंग वे ए.सी. अवयवों को बाईपास करने के लिए।
59.एम्प्लीफायर में वोल्टेज
गेन को db में प्रदर्षित करतें है।
60.सबसे अच्छा फ्रीक्वेसीं
रैस्पोन्स कर्व RC कपलिंग का होता है।
61.डी.यी. सिग्नल को
एम्प्लीफाई करने के लिए डायरेक्ट कपलिंग विधि प्रयुक्त करनी चाहिए।
62.रेडियो रिसीवर में तीन से
अधिक चरण में एम्प्लीफिकेषन होता है।
63.मल्टीस्टेज एम्प्लीफायर की
प्रथम चरण में RC कपलिंग का प्रयोग करतें है।
64.कॉमन एमीटर एम्प्लीफायर का
गेन (वोल्टेज तथा धारा) मध्यम आवृत्ति पर उच्चतम होती है।
65.कॉमन संग्राहक एम्प्लीफायर
को उत्सर्जक फॉलाओर के नाम से जाना जाता है।
66.कॉमन एमीटर एम्प्लीफायर
में आउटपुट वोल्टेज व इनपुट वोल्टेज के बीच फेज अन्तर 180 होता है।
67.मल्टीस्टेज एम्प्लीफायर
में प्रयुक्त कैपेसिटर का मान 0.1 होगा।
68.एम्प्लीफायर्स में ऋणात्मक
फीडबैक विकृति में कमी करना है।
69.कॉमन आधार एम्प्लीफायर का
धारा गेन इकाई से कम होता है।
70.जिस प्रवर्धक में निवेषित
संकेत की आकृति में कोई परिवर्तन नहीं होता वह लीनियर एम्प्लीफायर कहलातें है।
71. षक्ति प्रवर्धक वास्तव में
एक धारा प्रवर्धक होता है।
72.कास्केड एम्प्लीफायर का
डैसीबल गेन हर चरण के लाभ के योग के बराबर है।
73.डायरेक्ट कपलिंग का उपयोग
डी.सी. वोल्टेज में परिवर्तन के लिए किया जाता है।
74.पावर एम्प्लीफायर में लोड
प्रतिबाधा ट्रांजिस्टर के डायनेमिक रेसिस्टैंस से मैच करना का मुख्य कार्य है।
75.पावर एम्प्लीफायर में हीट
सिंक का प्रयोग गर्मी से होने वाली हानियों कम करता है।
76.कम पावर का एम्प्लीफायर
विषेष आई.सी. लगाकर बनाया जा सकता है।
77.555 टाइमर की पिन नम्बर 2 पर ट्रिगरिंग दी जाती है।
78.555 टाइमर में तथा ग्राउण्ड
पिन का नम्बर 8,1 होता है।
79.डायरेक्ट कपलिंग
एम्प्लीफायर परिपथ को आई.सी. के रूप में बनाया जा सकता है।
80.संकेत जनित्र में कॉलपिट
दोलित्र का प्रयोग किया जाता है।
81.मल्टीवाइब्र्रेटर परिपथ का
उपयोग कम्प्यूटर उपकरण में किया जाता है।
82.जो दोलित्र परिपथ
ज्या-तरंग से भिन्न आकृति की आवृत्ति उत्पन्न करता है, वह रिलैक्सेषन दोलित्र कहलाता है।
83.कला मया पुनर्निवेष
वोल्टेज एमीटर से प्राप्त की जाती है।
84.दोलित्र द्वारा उत्पन्न
आवृत्ति CRO या इलैक्ट्रॉनिक आवृत्ति
काउन्टर द्वारा मापी जाती है।
85.विन ब्रेज दोलित्र धनात्मक
व ऋणात्मक फीडबैक प्रयोग किया जाता है।
86.एक एम्प्लीफायर दोलित्र के
समान तब कार्य कर सकता है। जब उसका गेन अनन्त हो जाता है।
87.ऋणात्मक पुननिर्वेष से
प्रवर्धन की मात्रा घट जाती है।
88.फेज षिफ्ट R-C दोलित्र 100MGH तक की आवृति उत्पन्न करने
के लिए प्रयोग किया जाता है।
89.क्रिस्टल दोलित्र की
आवृत्ति स्थिरता 0.02 होती है।
90.मोनोस्टेबल मल्टीवाइब्रेटर
को वन शॉट के नाम से भी जाना जाता है।
91.बाइस्टेबल मल्टीवाइब्रेटर
को फ्लिप फ्लॅाप नाम से जाना जाता है।
92.एस्टेबल मल्टीवाइब्रेटर को
फ्री रनिंग के नाम से जाना जाता है।
93. बाइस्टेबल मल्टीवाइब्रेटर
का उपयोग फ्लिप फ्लॅाप व मैमारी के रूप में किया जाता है।
94. मोनोस्टेबल मल्टीवाइब्रेटर
का प्रयोग टाइमिंग के लिए प्रयोग किया जाता है।
95. मोनोस्टेबल मल्टीवाइब्रेटर
अधिकतर प्रयोग डिस्टोर्टेड के पुनः उत्पादन में किया जाता है।
96.दोलित्र जो अज्यावक्रीय
तरंग उत्पन्न सॉ-टूथ ऑसिलेटर तरंग उत्पन्न करतें है।
97.अनडैम्पड दोलित्र का आयाम
एक समान रहता है।
98.श्रृव्य आवृत्ति प्रवर्धक
प्रवर्धक माइक्रोफोन से प्राप्त सिग्नल को प्रवर्धित करने के लिए तथा रेडियो
रिसीवर में प्रयोग किया जाता है।
99.डायरेक्ट कपल्ड प्रवर्धक
का प्रयोग एक हर्ट्ज से कम आवृत्ति का प्रवर्धन के लिए किया जाता है।
100.श्रव्य आवृत्ति प्रवर्धक
में आवृत्ति(20Hz से 20KHz) सिग्नल को बिना विकृति के
प्रवर्धित करतें है।
101.इन्टरमीडिएट आवृत्ति
प्रवर्धक, रेडियों रिसीवर में
इन्टरमीडिएट आवृत्ति का मान (450Hz से 470KHz) के मध्य रखा जाता है।
102. इन्टरमीडिएट आवृत्ति
प्रवर्धक का प्रयोग उच्च गेन वाला I.F. ट्रांजिस्टर में किया जाता
है।
103. इन्टरमीडिएट आवृत्ति
प्रवर्धक जो रेजोनेन्ट परिपथ के इनपुट तथा आउटपुट में लगाया जाता है।
104.रेडियों आवृत्ति प्रवर्धक
में रेडियो आवृत्ति(20KHz से 3MHz) तक सिग्नल को प्रवर्धित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
105. रेडियों आवृत्ति प्रवर्धक
का प्रयोग रेडियो स्टेषन पर प्रसारण के लिए किया जाता है।
106.वीडियो आवृत्ति प्रवर्धक
में वीडियो आवृत्ति (4MHz से 7MHz) सिग्नल को प्रवर्धित करने के लिए
प्रयोग किया जाता है।
107.वीडियो आवृत्ति प्रवर्धक
का प्रयोग टेलीविजन में पिक्चर सिग्नल को प्रवर्धित करने के लिए किया जाता है।
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