CHAPTER-3
प्रत्यावर्तक(ALTERNATORS)
1.वह मशीन जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा मे परिवर्तित करती है, उसे जनित्र कहते है।
2.वह जनित्र जो यांत्रिक ऊर्जा को प्रत्यावर्ती धारा मे परिवर्तित करता है उसे प्रत्यावर्तक कहते है।
3.प्रत्यावर्तक की रेटिंग KVA मे की जाती है।
4.अल्टानेटर फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर आधारित होते है।
5.अल्टानेटर D.C. जनित्र की भांति चुम्बकीय प्ररेण के सिद्धांत पर कार्य करता है।
6.अधिकतम विद्युत वाहक बल की दिशा इसके विपरीत ध्रुव की ध्रुवता पर निर्भर करती है।
7.घूर्णी चुम्बकीय क्षेत्र के लिए केवल दो स्लिप रिंग की आवश्यकता होती है।
8.घुर्णी आर्मेचर के लिए 3 या 4 स्लिप रिंग की आवश्यकता होती है।
9.प्रत्यावर्तक मे उत्पन्न होने वाले विद्युत वाहक बल की आवृत्ति, गति द्वारा निर्धारित होती है।
10.प्रत्यावर्तक का स्टेटर सिलिकॉन स्टील की बनी हुई वलयाकार खांचेदार क्रोड का होता है।
11.अल्टानेटर मे शीतलता प्रदान करने के लिए अक्षीय, त्रिज्यांक तथा संवातक वाहिनियां होती है।
12.Salient pole type रोटर मे ध्रुवो की संख्या 6 से 40 तक होती है।
13.Salient pole type रोटर का प्रयोग हाइड्रो टरबो अल्टानेटर मे किया जाता है।
14.Salient pole type रोटर का व्यास ज्यादा अक्षीय लम्बाई कम होती है।
15.Salient pole type रोटर यांत्रिक रूप से कमजोर होता है।
16.बेलनाकार ध्रुव प्ररूपी रोटर मे 2 या 4 ध्रुव होते है।
17.बेलनाकार रोटर के स्लॉटों को मैग्नीज या स्टील की फन्नियों से बंद किया जाता है।
18.बेलनाकार रोटर का व्यास कम तथा अक्षीय लम्बाई ज्यादा होती है।
19.बेलनाकर रोटर यांत्रिक रूप से जटिल होता है।
20.बेलनाकार रोटर की गति 1500 से 3000 R.P.M. तक होती है।
21.Water turbine alternator मे पोलो की संख्या बढाकर निश्चित फ्रिक्वेसीं की ए.सी. प्राप्त की जाती है।
22.Steam turbine alternator मे प्रत्यावर्तक आर्मेचर मे पोल्स की संख्या कम रखी जाती है।
23.3-फेज प्रत्यावर्तक मे वाइन्डिग एक-दूसरे से 1200 कोण पर स्थापित की जाती है।
24.अल्टानेटर मे लोड परिवर्तन के स्पीड भी परिवर्तित हो जाती है इस दोष को हन्टिग या फेज स्विगिंग कहते है।
25.हन्टिग दोष को फेज स्विगिंग के नाम से भी जाना जाता है।
26.हन्टिग दोष को दूर करने के लिए पोलो के सिरो पर खाचे बनाकर उनमे डेम्पर वाइन्डिग स्थापित की जाती है।
27.किसी अल्टानेटर की उत्तेजन और गति को समान रखते हुए उसके लोड को पूरा हटा लिया जाए तब उसके टर्मिनल विभव मे जो परिवर्तन होता है उसे प्रत्यावर्तक का विभव नियमन कहते है।
28.पश्चगामी लोड पर अल्टानेटर के लोड को पूरा हटा लेने पर उसके टर्मिनल विभव का मान बढता है तो विभव नियमन धनात्मक होगा।
29.अग्रगामी लोउ पर अल्टानेटर के लोड को पूरा हटा लेने पर उसके टर्मिनल विभव का मान घटता है तो विभव नियमन ऋणात्मक होगा।
30.R-Y-B फेज क्रम की जांच करने के लिए फेज क्रम टेस्टर या सूचक यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
31.डिस्ट्रीब्यूशन फैक्टर को Breadth factor या Spread factor या Winding factor भी कहते है।
32.अल्टानेटर मे शॉर्ट पिच वाइन्डिग की जाती है।
33.डिस्ट्रीब्यूशन फैक्टर Kd= sin n α/2 /n sin α/2
34.शॅार्ट पिच वाइन्डिग प्रयोग किया जाता है क्योकिं यह हार्मोनिक प्रभाव को खत्म करता है।
35.ए.सी. मशीनों की शक्ति, लोड करन्ट द्वारा निर्धारित होती है जो पावर फैक्टर पर निर्भर करती है
इसलिए प्रत्यावर्तक की रेटिंग KVA or MVA मे की जाती है।
इसलिए प्रत्यावर्तक की रेटिंग KVA or MVA मे की जाती है।
KW=KVA*COS
36.(अल्टानेटर को समानान्तर क्रम मे प्रचालन-
1.दोनो अल्टानेटर का फेज क्रम सही होना चाहिए
2.दोनो अल्टानेटर की फ्रिक्वेन्सी समान होनी चाहिए।
3.दोनो अल्टानेटर की गति समान होना चाहिए।
4.दोनो अल्टानेटर का फेज कोण समान होना चाहिए।
5.दोनो अल्टानेटर की आउटपुट वोल्टेज समान होना चाहिए।)
37.सिंक्रोस्कोप अल्टानेटर पैरलल करने के काम आता है।
38.सिंक्रोस्कोप रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड के आधार पर कार्य करता है।
39.सिंक्रोस्कोप के रोटर को सदैव सहायक बस बार से जोडना चाहिए।
40.सिंक्रोस्कोप के स्टेटर को मुख्य बस बारों से जोडना चाहिए।
41.दो फेज तुल्यकालिक हो जाने तीसरा फेज स्वत: तुल्यकालिक हो जाता है।
42.अल्टानेटर की प्रत्येक फेज वाइन्डिग, आर्मेचर की फेज एवं करंट प्रति फेज प्रतिरोध के तुल्य वोल्टेज ड्राप करती है।
43.अल्टानेटर मे लोड मे पावर फैक्टर के अनुरूप आर्मेचर रिएशन का प्रभाव घटता बढता रहता है।
44.अल्टानेटर द्वारा उत्पन्न वोल्टेज, फील्ड करंट पर निर्भर करता है।
45.सिंक्रोनाइजिंग के लिए डार्क एण्ड ब्राइट लैम्प विधि सरल एवं प्रचलित विधि है।
46.अल्टानेटर मे आर्मेचर रिएक्शन का प्रभाव टर्मिनल वोल्टेज पर पडता है।
47.अल्टानेटर मे उत्तेजन परिवर्तन से केवल प्रतिक्रियाशील शक्ति ही परिवर्तित होती है, सक्रिया शक्ति मे कोई परिवर्तन नही होता है।
48.एक्साइटर को अल्टानेटर की रोटर पर जोडा जाता है।
49.सिंक्रोनोस्कोप मे दो फेज वाइन्डिग स्थापित की जाती है।
50.अल्टानेटर द्वारा उत्पन्न किया गया वोटेल्ज=2.22×kp×kdר×z×f
51.अल्टानेटर की दक्षता=KVA(p.f.)×100/ KVA(p.f.)+हानियां
52.यदि आर्मेचर क्वाइल के दोनो पार्श्वो को 1800 से कम अंश पर स्थापित किया जाए तो वह शार्ट
पिच वाइण्डिग होगी।
पिच वाइण्डिग होगी।
53.प्रतिशत वोल्टेज रेग्यूलेशन=नो लोड-फुल लोड×100/फुल लोड
54.अधिक के अल्टानेटर को हाइड्रोजन द्वारा ठंडा किया जाता है।
55.फील्ड को रेग्यूलेट करके फलक्स को बढाकर अल्टानेटर की e.m.f. बढाई जाती है।
56.एक्साइटर डी.सी. सप्लाई देता है।
57.अल्टानेटर का आउटपुट बढाने के लिए फ्यूल को बढाते है।
58.अल्टानेटर के रोटर के घुमाने वाले मशीन को प्राइम मूवर कहते है।
59.अल्टानेटर का डिस्ट्रीब्यूशन फैक्टर का मान 1 से कम होता है।
60.अल्टानेटर की बॅाडी कास्ट आयरन की बनी होती है।
61.पहले से चल रहा अल्टानेटर को रनिंग मशीन तथा जोडे जाने वाले अल्टानेटर को इनकमिंग मशीन कहते है।
62.डार्क लैम्प विधि मे अल्टानेटर तुल्याकलिक हो जोने तीनो लैम्प बुझ जाते है।
63.अल्टानेटर की फ्रिक्वेंसी मे अन्तर होने के कारण डार्क लैम्प विधि मे लैम्प जलते-बुझते रहते है।
64.आल्टानेटर की तुल्यकालिकता की ब्राइट लैम्प विधि मे वोल्टेज मे अन्तर होने के कारण धीमे जलते है।
65.जब अल्टानेटर बस-बार से न पावर ले रहा हो और न ही दे रहा हो तो इस अवस्था मे मशीन को तैरता हुआ कहा जाता है।
66.3-फेज अल्टानेटर मे आर्मेचर वाइन्डिग स्टार रूप मे संयोजित होती है।
67.प्रत्यावर्तक किफायत तब होता है जब वह अपने पूर्ण पर चलता है।
68.इम्पीडेंस और आर्मेचर रिएक्शन के कारण अल्टानेटर का लोड बढने पर वोल्टेज कम हो जाती है।
अल्टरनेटर की थ्योरी
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