CHAPTER-10
ALTERNATING CURRENT
1.पावर फैक्टर बढाने के लिए केपेसिटर पैरलल में लगाना चाहिए।
2.शुद्ध केपेसिटिव परिपथ मंे करन्ट एप्लाइड वोल्टेज से आगे रहती है।
3.भारत की फ्रिक्वेन्सी 50 Hz है।
4.का पूरा नाम है।
5.इम्पीडेन्स की इकाइ्र ओम्ह Ω है।
6.एडमिटैन्स Y= √ R2 + B2 होता है।
7.ए.सी. सर्किट में चोक का प्रयोग करन्ट को निन्त्रित करने हेतु किया जाता है।
8.केपेसिटव रिएक्टेन्स XC=1/2πfC होता है।
9.अस्थिर कॉन्टेक्ट प्वाइॅन्ट पर स्पार्किंग कम करने के लिए केपेसिटर का प्रयोग किया जाता है।
10.पावर फैक्टर कम होने पर ट्रांसमिषन लाइन की वोल्टेज ड्रॉप बढ जाती है।
11.शुद्ध प्रेरकीय ए.सी. परिपथ में धारा, वोल्टेज से ठीक 900 अंष पीछे होती है।
12.शुद्ध केपेसिटिव ए.सी. में धारा, वोल्टेज से 900 अंष आगे होती है।
13.युक्त ए.सी. परिपथ में कुल प्रतिबाधा Z = √ R2 + (XL~Xc)2 के तुल्य होती है।
14.शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ में शक्ति गुणक का मान इकाई होता है। और प्रतिरोध, प्रतिबाधा के तुल्य होता है।
15.किसी ए.सी. परिपथ में प्रेरकीय प्रतिघात, आवृत्ति तथा प्रेरकत्व के अनुक्रमानुपाती होता है।
16.जिस ए.सी. परिपथ में केवल प्रतिरोध उपस्थित हो वह परिपथ ओम्ह के नियम का अनुपालन करता है।
17.ए.सी. का r.m.s. मान उसके औसत मान से सदैव अधिक होता है।
18.ए.सी. का सुगमता से अपचयन किया जा सकता है।
19.फ्रिक्वेन्सी को हटर्ज में मापते है।
20.अधिकतम मान व r.m.s. मान के अनुपात को पीक फैक्टर या एम्प्लीट्यूड फैक्टर कहतें है।
21. Irms=Imax×0.707 होता है।
22.डी.सी. सप्लाई का सर्किट टूटतें समय अधिक स्पार्किंग करता है।
23.ए.सी. सिंगल फेज इन्डक्टिव रेजिस्टिव परिपथ Z = √ R2 + XL2 में होता है।
24.ए.सी. सर्किट की केपेसिटिव रिएक्टेन्स फ्रिक्वेन्सी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
25.शुद्ध रेजिस्टिव परिपथ का पावर फैक्टर इकाई होता है।
26.यदि पावर स्थिर रखी जाए तो सर्किट पर पावर फैक्टर कम होने से सर्किट का करन्ट बढ जाता है।
27.पावर फैक्टर केपेसिटर व सिन्क्रोनस मोटर लगाकर बढाया जा सकता है।
28.सिंगल फेज में पावर परिपथ P=V×I×COSØ होता है।
29.ए.सी. परिपथ में वोल्ट धारा का आभासी शक्ति कहलाती है।
30.शक्ति गुणक सुधारने के लिए लाइन के आर-पार संधारित्र प्रयोग किया जाता है।
31.संधारित्र द्वारा ए.सी. के प्रस्तुत किए जाने वाला विरोध, केपेसिटिव रिएक्टेन्स कहलाता है।
32.किसी परिपथ में वास्तविक शक्ति से आभासी शक्ति का अनुपात पावर फैक्टर कहलाता है।
33.श्रेणी ए.सी. परिपथ में R/Z पावर फैक्टर होता है।
34.प्रतिबाधा(इम्पीडेन्स)का मात्रक ओम्ह है उसका Z प्रतीक है।
35.प्रतिरोध और प्रतिघात का संयुकत रूप प्रतिबाधा कहलाता है।
36.धारिता का मात्रक फैरेड है और इसे प्रदर्षित करतें है।
37.शुद्ध केपेसिटिव परिपथ में धारा, वोल्टता से 900 अंष आगे होती है।
38.साइनसोइडल तंरग के लिए फार्म फैक्टर होता 0.707×max value/0.637×max value है।
39.ए.सी. सर्किट में अधिकतम करन्ट केपेसिटिव रिएक्टेन्स की शर्त, केपेसिटिव रिएक्टेन्स=इम्पीडेन्स है।
40.इन्डक्टिव रिएक्टेन्स फ्रिक्वेन्सी के सीधे अनुपात में होता है।
41.ए.सी. के आर.एम.एस. मान को एम्पियर वोल्टमीटर में मापतें है।
42.केपेसिटिव परिपथ में पावर फैक्टर का मान शून्य लीडिंग होता है।
43.पावर फैक्टर बढाने के लिए केपेसिटर की रेटिंग KVAR होती है।
44.रिएक्टेन्स का व्युत्क्रम सस्प्टेन्स को कहतें है।
45.प्रत्यावर्ती धारा का आर.एम.एस. मान प्रभावी मान कहलाता है।
46.प्रत्यावर्ती राषि के परिवर्तनों के एक पूरे सैट को एक चक्र कहतें है। यह चक्र पूर्ण 3600 होता है।
47.एक प्रतिरोधक में से ए.सी. प्रवाहित की जाती है।, तो वास्तविक शक्ति वैद्युतिक शक्ति ऊष्मा में परिवर्तित होती है।
48.पावर फैक्टर की कोई इकाई नही होती है।
49.संधारित्र की धारिता कार्य आवृत्ति से प्रभावित नहीं होती है।
50.छत के पंखें में 2.5 माइक्रो फैरड की धारिता के संधारित्र उपयोग किया जाता है।
51.एक फेज मोटर में सैल्फस्टार्टिंग के लिए संधारित्र फेज विघटित का कार्य करता है।
52.टयूब लाइट के स्टार्टर में द्विधातु पत्ति के समानान्तर में जुड कैपेसिटर का कार्य रेडियो मंे उत्पन्न शोर को कम करता है।
53.डी.सी. इलैक्ट्रोलाइट कैपेसिटर की पॉजिटिव तार बडी होती है।
54.संधारित्र की प्लेटों के बीच दूरी बढने से इसकी धारिता कम होती है।
55.एक रोधक पदार्थ का मूल गूण तथा उच्च परावैद्युत शक्ति होना चाहिए।
56.एक संधारित्र में दो प्लेटें एक इसंुलेटर द्वारा पृथक करके रखी जाती है। इस इंसुलेटर पदार्थ को परावैद्युत माध्यम भी कहतें हैं।
57.प्रत्यावर्ती धरा के विरोध में संधारित्र द्वारा उपस्थित की गई बांधा को धारिता प्रतिघात कहतें है।
58.परिपथ में धारिता प्रतिघात में वृद्धि, कुल धारिता में कमी करके कर सकतें है।
59.एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में जिसमें धारिता गुण अधिक होता है उसमें धारा वोल्टता से आगे होती है।
60.जब एक शुद्ध धारिता परिपथ को प्रत्यावर्ती वोल्टता प्रदाय से जोडा जाता है। तो धारा वोल्टता से एक चतुर्थाषं आगे रहती है।
61.एक आदर्ष स्थिति में एक शक्ति गुणक की सूई शून्य पोजिषन पर नहीं ठहरती है क्योकि मीटर में नियन्त्रक युक्ति नहीं होती है।
62.एक श्रेणी परिपथ में अनुनाद वक्र आवृत्ति व प्रतिबाधा के बीच खीचा जाता है।
63.एक परिपथ में धारा शक्तिहीन है यदि परिपथ में प्रतिरोध शुन्य है।
64.ए.सी. परिपथ में संधारित्र द्वारा परिपथ में बाधा उपस्थित करने गुण को धारिता प्रतिघात कहतें है।
65.ए.सी. परिपथ में धारिता प्रतिघात प्रदाय आवृत्ति के तुल्य होती है।
66.व्यावहारिक रूप् में कोई भी कुण्डली शुद्ध प्रेरणिक नहीं होती है।
67.अनुमानित शक्ति की इकाई वोल्ट एम्पियर VA होती है।
68.जब प्रेरणिक परिपथ को खोला जाता है। तो उच्च वोल्टता उत्पन्न होती है।, यह वोल्टता इंडक्वि सज्र वोल्टेज कहलाती है।
69.यदि एक ए.सी. परिपथ श्रेणी परिपथ में प्रेरकत्व का मान बढाया जाये तो वोल्टता व धारा के बीच कला अन्तर बढेगा।
70.एक शुद्ध धरिता परिपथ में खर्च हुई शक्ति शून्य होती है।
71.घरेलू उपकरण ए.सी. प्रदाय के साथ समानान्तर में जोडे जातें है क्याकि प्रत्येक उपकरण का परिचालन एक दूसरे से स्वतन्त्र रहे।
72.धारा का पूर्ण अवयव ICOSØ होता है।
73.टयूब लैम्प परिपथ में चोक के कारण शक्ति गुणक पष्च्गामी हो जाता है।
74.इकाई प्रत्यक्ष शक्ति का सही VA रूप है।
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